अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को टैरिफ पर अमेरिका में ही बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी अपील कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया है। अमेरिका की अपील कोर्ट सुप्रीम कोर्ट के बाद सर्वोच्च कोर्ट है। यह सब हुआ है अमेरिका के प्रधान उप सॉलिसिटर जनरल नील कत्याल की अपील पर। वैसे तो नील कुमार कत्याल जन्म इलिनोइस के शिकागो में हुआ था। लेकिन उनके माता पिता मूल रूप से भारत के हैं।

बराक ओबामा के समय ऐसे आए थे चर्चा में

अमेरिकी में एक प्रस्ताव लाया गया था कि राज्य के कानून बनाने के जैसे ही राज्य की विधानसभाएं अपने राज्य के लिए चुनाव के नियम भी बना सकें। इसमें विधानसभा की वरीयता अदालतों से भी ज्यादा होती। अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने इस केस को बहुमत से खारिज कर दिया था। केस में सरकार की तरफ से नील से बहस की थी। फैसले पर पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी खुशी जाहिर की थी। अमेरिका के लोगों ने भी नील को सच्चा देशभक्त और नेशनल हीरो बताया था।

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लेखन के भी हैं शौकीन

कत्याल येल लॉ जर्नल के संपादक रहे हैं। उन्होंने अखिल अमर और ब्रूस एकरमैन के अधीन अध्ययन किया। जिनके साथ उन्होंने 1995 और 1996 में विधि-समीक्षा और राजनीतिक-राय पत्रिकाओं में लेख प्रकाशित किए। 1995 में अपनी जेडी ( ज्यूरिस डॉक्टर ) की डिग्री प्राप्त करने के बाद, कत्याल ने दूसरे सर्किट के लिए अमेरिकी अपील न्यायालय के न्यायाधीश गुइडो कैलाब्रेसी के लिए और फिर संयुक्त राज्य अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश स्टीफन ब्रेयर के लिए क्लर्क के रूप में कार्य किया।

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डार्टमाउथ कॉलेज के किया ग्रेजुएशन

नील कात्याल ने इलिनोइस के विल्मेट स्थित जेसुइट कैथोलिक हाई स्कूल लोयोला अकादमी से पढ़ाई की। इसके बाद साल 1991 में उन्होंने डार्टमाउथ कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। जहां वे फी बीटा कप्पा, सिग्मा नू बिरादरी और डार्टमाउथ फोरेंसिक यूनियन के सदस्य थे।

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2009 में बने थे सॉलिसिटर जनरल

नील कुमार कत्याल 3 फरवरी 2009 को यूएसए के सॉलिसिटर जनरल बने थे। इस समय बराक ओबामा अध्यक्ष थे। इसके बाद 2010 और 2011 में भी नील को सॉलिसिटर जनरल का पद सौंपा गया। साल 2023 में नील को यूएसए का प्रधान उप सॉलिसिटर जनरल बनाया गया।

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