सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी की मौत के बाद ईरान ने ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद बागेर जोलकाद्र को नया सिक्योरिटी चीफ नियुक्त किया है. जोलकाद्र की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है और ईरान अपनी सुरक्षा नीतियों को और सख्त करने की कोशिश में है. उन्हें सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (SNSC) का नया सचिव नियुक्त कर दिया है. यह पद देश की सुरक्षा, रक्षा, विदेश नीति और विवादास्पद न्यूक्लियर कार्यक्रम से जुड़े अहम फैसलों का अंतिम केंद्र माना जाता है. जोलकाद्र अब सीधे सुप्रीम लीडर मोजतबा खमेनेई को रिपोर्ट करेंगे.
कौन हैं मोहम्मद बागेर जोलकाद्र?
ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद बागेर जोलकाद्र ईरान की सत्ता और सैन्य तंत्र का एक जाना-पहचाना चेहरा हैं. जोलकाद्र इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) के सीनियर कमांडर रह चुके हैं. उनके पास सैन्य रणनीति का दशकों का अनुभव है. इस नई जिम्मेदारी से पहले वे ईरान की ‘एक्सपीडिएंसी डिस्कर्नमेंट काउंसिल’ के सचिव के रूप में कार्य कर रहे थे. यह संस्था ईरान में नीतिगत विवादों को सुलझाने और सुप्रीम लीडर को सलाह देने का काम करती है. जोलकाद्र ईरान के गृह मंत्रालय में सुरक्षा मामलों के उप मंत्री भी रह चुके हैं, जिससे उनके पास सैन्य और नागरिक सुरक्षा दोनों का गहरा अनुभव है.
मोहम्मद बागेर जोलकाद्र का पूरा बैकग्राउंड
मोहम्मद बागेर जोलकाद्र का जन्म 1954 में शिराज के पास फासा शहर में हुआ था. परिवार धार्मिक और कट्टर विचारधारा से जुड़ा था. उन्होंने तेहरान यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में डिग्री हासिल की. छात्र जीवन में ही वे राजनीतिक रूप से सक्रिय हो गए और 1979 की इस्लामिक क्रांति से पहले मंसूरुन नामक इस्लामिक गोरिल्ला संगठन के साथ काम किया. इसी अनुभव ने उन्हें क्रांतिकारी और सुरक्षा ढांचे में मजबूत नींव दी. क्रांति के बाद वे इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) में शामिल हुए और तेजी से तरक्की की. वे ब्रिगेडियर जनरल के रैंक तक पहुंचे और लंबे समय तक IRGC के डिप्टी कमांडर रहे.
अली लारीजानी का उत्तराधिकारी बनना क्यों है खास?
अली लारीजानी ईरान की राजनीति के एक स्तंभ थे. उनके निधन से पैदा हुए खाली स्थान को भरने के लिए खामेनेई ने एक ऐसे व्यक्ति को चुना है जो न केवल वफादार है, बल्कि कट्टरपंथी सैन्य विचारधारा का प्रतिनिधित्व करता है. जोलकाद्र की नियुक्ति संकेत देती है कि ईरान अपनी सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की ढील देने के मूड में नहीं है.
क्या होगा असर?
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जोलकाद्र के नेतृत्व में ईरान की खुफिया और सुरक्षा एजेंसियां और अधिक सक्रिय हो सकती हैं. IRGC के साथ उनके पुराने संबंधों के कारण सेना और सरकार के बीच तालमेल और भी मजबूत होने की उम्मीद है.
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