ब्रिटिश लेबर पार्टी के सीनियर नेता और मेकरफ़ील्ड से हाल ही में चुने गए सांसद (MP) एंडी बर्नहम ने सोमवार को UK लेबर पार्टी की कमान संभालने और कीर स्टारमर के बाद अगला प्रधानमंत्री बनने की दिशा में कदम बढ़ाया. ‘किंग ऑफ़ द नॉर्थ’ से मशहूर बर्नहम ने जून 2026 के संसदीय उपचुनाव में शानदार जीत के बाद खुद को स्टार्मर के अंदरूनी प्रतिद्वंद्वी के तौर पर स्थापित किया. इससे नेतृत्व का संकट पैदा हुआ और स्टार्मर की सरकार गिर गई.
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कौन हैं एंडी बर्नहम?
1970 में लिवरपूल में जन्मे बर्नहम ने राजनीति में आने से पहले कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की. उन्होंने 2001 से 2017 तक लेह (Leigh) से सांसद के तौर पर काम किया और गॉर्डन ब्राउन के कार्यकाल में हेल्थ सेक्रेटरी और कल्चर सेक्रेटरी जैसे अहम कैबिनेट पदों पर रहे. वो इससे पहले दो बार लेबर पार्टी की लीडरशिप के लिए चुनाव लड़ चुके हैं , जिनमें से 2010 और 2015 के चुनाव वो हार गए थे). 2017 में वो वेस्टमिंस्टर छोड़कर ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर बने और लगातार तीन बार ये चुनाव जीते. उन्हें COVID-19 महामारी के दौरान ‘किंग ऑफ़ द नॉर्थ’ का ख़िताब मिला, जब उन्होंने बोरिस जॉनसन की कंज़र्वेटिव सरकार का ज़ोरदार विरोध किया और वेस्टमिंस्टर पर ‘लंदन-केंद्रित’ रवैया अपनाने का आरोप लगाया, जिससे उत्तरी समुदायों को नुकसान पहुंचा था. मेयर के तौर पर उन्होंने ‘बी नेटवर्क’ (Bee Network) के ज़रिए लोकल पब्लिक ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को सफलतापूर्वक सार्वजनिक कंट्रोल में लिया.
क्यों फेमस हैं बर्नहम?
पिछले कुछ सालों में, बरनहम चुपचाप देश के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक बन गए हैं. उनके करिश्माई व्यक्तित्व ने उनकी पब्लिक इमेज से जुड़ी विरोधाभासी बातों को भी पीछे छोड़ दिया है; जैसे कि वेस्टमिंस्टर में खुद को बाहरी बताने की उनकी ज़िद, जबकि असल में वो 24 साल की उम्र में संसदीय रिसर्चर, 28 साल की उम्र में स्पेशल एडवाइज़र और सिर्फ़ 31 साल की उम्र में पहली बार सांसद बन गए थे. संसद में अपने 16 साल के कार्यकाल के दौरान, उन्होंने टोनी ब्लेयर और गॉर्डन ब्राउन दोनों की सरकारों में काम किया. वो हेल्थ मिनिस्टर बने, 2010 और 2015 में लेबर पार्टी की लीडरशिप के लिए दो बार चुनाव लड़े, लेकिन सफल नहीं हो पाए. लीडरशिप के दूसरे चुनाव में उन्हें अनुभवी सोशलिस्ट जेरेमी कॉर्बिन ने बुरी तरह हराया, कॉर्बिन की जीत ने पार्टी को वामपंथी विचारधारा की ओर मोड़ दिया.
किसने दी ‘किंग ऑफ नॉर्थ’ की उपाधि?
हालांकि बर्नहम ने शुरू में कॉर्बिन की शैडो कैबिनेट में काम किया था, लेकिन 2017 में मैनचेस्टर का मेयर बनने के बाद वे लेबर पार्टी के अंदरूनी झगड़ों से काफी हद तक दूर रहे. ये झगड़े कॉर्बिन की लीडरशिप के दौरान और उसके ठीक बाद पार्टी में हावी रहे थे. इसलिए, जहां लेबर पार्टी का वामपंथी धड़ा स्टारमर को इसलिए नापसंद करता है क्योंकि उन्होंने पार्टी को सेंटर की ओर मोड़ा और कॉर्बिन को बाहर का रास्ता दिखाया, वहीं बर्नहम का नाम इस दौर से उतना नहीं जुड़ा है. मैनचेस्टर के मेयर के तौर पर, बर्नहम ने वेस्टमिंस्टर (ब्रिटिश सरकार) के सामने डटकर खड़े होने की अपनी काबिलियत दिखाई. ऐसी घटनाओं में जिन्होंने ब्रिटिश राजनीति में लंबे समय से चले आ रहे उत्तर-दक्षिण के बंटवारे को उजागर किया. इससे उनकी ‘बाहरी व्यक्ति’ वाली छवि और मजबूत हुई और उन्हें ‘किंग ऑफ़ द नॉर्थ’ का उपनाम मिला.
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