Who is Ali Larijani: ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव को देखते हुए मिडिल ईस्ट में युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं. हालांकि इसकी संभावना बहुत कम है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर सीधा हमला करेंगे, लेकिन ऐसी आशंकाएं जताई जा रही थी कि वो तेहरान में वेनुजुएला जैसी स्ट्राइक करवा सकते हैं. ईरान पर अमेरिकी हमले की तलवार काफी समय से लटक रही है, मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इसकी बहुत ज्यादा संभावना थी की ईरान पर अमेरिका स्ट्राइक करने वाला था, लेकिन एक शख्स की वजह से ट्रंप सरकार ने अपना फैसला बदल दिया.

अली लारीजानी की वजह से पीछे हटा अमेरिका


हम जिस शख्स की बात कर रह हैं उसका नाम है अली लारीजानी. सऊदी अरब, कतर और ओमान की मध्यस्थता से अमेरिका ने बातचीत का रास्ता चुना, लेकिन अली लारीजानी की कूटनीतिक चालों ने खामेनेई सरकार को संकट के मुहाने से खींच लिया. अगस्त 2025 में ईरान की सर्वोच्च सुरक्षा परिषद का सचिव बनते ही इस कट्टरपंथी नेता ने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को मजबूत किया, जिससे वाशिंगटन सरकार को सैन्य कार्रवाई पर एक बार फिर से सोचने के लिए मजबूर होना पड़ा.

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कौन हैं अली लारीजानी?


1958 में जन्मे अली लारीजानी एक प्रमुख शिया परिवार से ताल्लुक रखते हैं और उनके पास डॉक्टरेट डिग्री भी है. करियर की शुरुआत इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स में कमांडर के रूप में हुई, फिर 1994 में वे ईरान प्रसारण निगम के प्रमुख बने. 2004 से खामेनेई के सलाहकार रहे और 2005 में राष्ट्रपति चुनाव भी लड़ चुके, हालांकि सफलता हाथ न लगी. राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के धुर विरोधी माने जाने वाले लारीजानी ने हालिया तनाव में सक्रिय भूमिका निभाई. सऊदी क्राउन प्रिंस सहित तीन बार रियाद का दौरा किया, इराक, लेबनान और पाकिस्तान में राजनयिक संबंध साधे. इन प्रयासों से अरब देशों ने अमेरिका को चेतावनी दी कि ईरान पर हमला क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाल देगा.

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काम आई अली लारीजानी की रणनीति


आंतरिक संकट के समय अली लारीजानी ने सेना में अहमद वाहिदी को उप-कमांडर और ब्रिगेडियर मोहम्मद अकरमिनिया को प्रवक्ता बनवाकर मोर्चेबंदी की. खुद मीडिया में उतरकर उन्होंने विरोध प्रदर्शनों को अमेरिका-इजरायल की साजिश करार दिया, जिसे ईरानी प्रचार तंत्र ने जमकर उछाला. इसी क्रम में अमेरिका ने शुक्रवार को उन पर प्रतिबंध ठोंक दिया, ठीक जब राष्ट्रपति ट्रंप ने स्ट्राइक को स्थगित किया. व्हाइट हाउस बैठक में सैन्य अधिकारीयों ने चेताया कि अधूरी कार्रवाई लंबे युद्ध में उलझा सकती है, क्योंकि अमेरिकी सेना फिलहाल तेहरान से टकराव के लिए तैयार नहीं. लारीजानी की यह रणनीति ईरान की किलेबंदी को नई मिसाल बना रही है.

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