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बाढ़ से तबाही के बाद अब नेपाल के सामने है कौन सी असली चुनौती? बर्बादी से उबरने में लग जाएंगे बरसों!

Nepal Flash Flood: नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ बाढ़ का पानी निकालना नहीं है. चैलेंज है पीड़ित लोगों की जिंदगी फिर से पटरी पर लाना, लोगों के रोजगार का इंतेजाम करना और ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना जो भविष्य में मौसम की किसी भी गंभीर मार का सामना कर सके.

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नेपाल में बाढ़ के कारण तबाही (Photo-PTI)

Real Challenge For Nepal After Flash Floods: नेपाल में आए फ्लैश फ्लड ने बहुत कुछ तबाह कर दिया है, ऐसी त्रास्दी अपने आप में एक बड़ी चुनौती होती है, लेकिन इससे भी बड़ा चैलेंज नेचुरल डिजास्टर से इलाको को उबारना. रेस्क्यू ऑपरेशन के अलावा, प्रशासन को जरूरी सेवाएं बहाल करनी होंगी, बर्बाद हो चुके बुनियादी ढांचे को फिर से तैयार करना होगा और इस बात का ख्याल रखना होगा कि विस्थापित परिवारों को खाना और पनाह मिले. आइए जानते हैं कि अचानक आई बाढ़ के बाद नेपाल को और कौन-कौन चुनौतियों का सामना करना है.

बाढ़ के बाद की चुनौतियां

1. गाद और मलबे के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन

रेस्क्यू टीम को मुश्किल हालात का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि सड़कें, पुल, घर और नदी के किनारे कीचड़, चट्टानों, रेत और दूसरे मलबे की मोटी परतों के नीचे दबे हुए हैं. बचाव कर्मियों के अलग-थलग पड़े लोगों तक महफूज तरीके से पहुंचने से पहले रास्तों को साफ करने के लिए खुदाई करने वाली मशीनों (एक्सकेवेटर), लोडर और बुलडोजर जैसी भारी मशीनों की जरूरत होगी.

(Photo-PTI)

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2. गाद और मलबा हटाना

बाढ़ के कारण जमा हुई गाद को हटाना सबसे बड़े कामों में से एक होगा. सड़कों, बस्तियों, ड्रेनेज चैनलों और पावर फैसिलिटीड को साफ करने के लिए एक्सकेवेटर और हेवी अर्थ-मूविंग इक्विपमेंट तैनात किए जा सकते हैं. मलबे को नदियों में वापस धकेलने के बजाय तय निपटान क्षेत्रों में ले जाया जाना चाहिए, क्योंकि नदियों में मलबा डालने से बाढ़ का खतरा और बढ़ सकता है. पानी के नॉर्मल फ्लो को बहाल करने के लिए नदी के चैनलों से भी कंट्रोल्ड तरीके से गाद हटाने की जरूरत हो सकती है, खासकर घनी आबादी वाले इलाकों के आसपास.

(Photo-PTI)

3. हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स को फिर से शुरू करना

अगर पावरहाउस, ट्रांसमिशन लाइंस, एक्सेस रोड और वाटर स्टोरेज टैंक डैमेड हो गए हैं, तो नेपाल के हाइड्रो पावर सेक्टर को लंबे समय तक रुकावट का सामना करना पड़ सकता है. इंजीनियर्स को सबसे पहले हर प्रोजेक्ट के डैमेज का पता लगाना होगा, तभी रिकंस्ट्रक्शन वर्क शुरू किया जा सकता है. वाटर इनटेक एरियाज से कीचड़ और चट्टानों को हटाना होगा, डैमेज हो चुके इक्विपमेंट की मरम्मत करनी होगी या उन्हें बदलना होगा, और ट्रांसमिशन नेटवर्क को रिस्टोर करना होगा. हाइड्रो पावर स्टेशंस को फिर से चालू करने से पहले सुरक्षा जांच जरूरी होगी.

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(Photo-PTI)

4. कैसे दोबारा तैयार किया जाएगा इंफ्रा?

सड़कें और पुल नेपाल के उबरने की प्रक्रिया में अहम होंगे. भरोसेमंद ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी के बिना, राहत सामग्री दूर-दराज के इलाकों तक नहीं पहुंच सकती और रिकंस्ट्रक्शन का काम सही तरीके से शुरू नहीं हो सकता. डैमेज्ड स्कूलों, हेल्थ सेंटर्स, कम्यूनिकेशन नेटवर्क, वाटर सिस्टम्स और बिजली सप्लाई के बुनियादी ढांचे को भी रिस्टोर करने की जरूरत होगी. रिकंस्ट्रक्शन प्रॉसेस में फ्यूचर डिजास्टर के रिस्क को कम करने के लिए मजबूत और फ्लड रेसिस्टेंट डिजाइंस पर फोकस किया जाना चाहिए.

(Photo-PTI)

5. पीड़ित लोगों की मदद

जिन लोगों ने अपने घर और रोजगार खो दिए हैं, उनके लिए इस तबाही से उबरना आसान नहीं होगा. सरकार को वत्तीय मदद, बीमारों का इलाज, उनका रिहैबिलिटेशन कराना सरकार के लिए एक बड़ा चैलेंज होगा. इसके अलावा जिन बच्चों के स्कूल डैमेज हो गए हैं, उनकी एजुकेशन की गारंटी हर हाल में जरूरी है.

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(Photo-PTI)

6. घर और राशन की गारंटी

पीड़ित लोगों को घर दिलाना सरकार की एक लॉन्ग टर्म प्रायोरिटी होनी चाहिए. टेंपरेरी शेल्टर फिलहाल सबसे जरूरी है, जबकि लोगों के लौटने से पहले डैमेज हो चुके मकानों को दुरुस्त करना अहम है. जिन परिवारों के घर तबाह हो गए हैं, उन्हें घरों के लिए ग्रांट या दूसरी तरह की आर्थिक मदद की जरूरत पड़ सकती है.

(Photo-PTI)

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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