मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक नई सैन्य तकनीक चर्चा में आ गई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को निशाना बनाने के लिए इजरायल ने 'ब्लू स्पैरो' नाम की मिसाइल का इस्तेमाल किया. हालांकि इस बारे में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस खबर के सामने आने के बाद ये मिसाइल पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गई है.
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क्या है ब्लू स्पैरो मिसाइल?
ब्लू स्पैरो इजरायल की एड्वांसड मिसाइल तकनीक का हिस्सा है. इसे मूल रूप से बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम की टेस्टिंग के लिए तैयार किया गया था, यानी इसका इस्तेमाल ऐसे लक्ष्य तैयार करने के लिए किया जाता था जिन पर इजरायल का डिफेंस सिस्टम ट्रेनिंग कर सके. लेकिन इसकी तकनीक इतनी आधुनिक है कि जरूरत पड़ने पर इसे हमले के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है. यही वजह है कि इसे इजरायल की उन्नत सैन्य क्षमताओं में गिना जाता है. ब्लू स्पैरो मिसाइल को आमतौर पर लड़ाकू विमानों से दागा जाता है. लॉन्च होने के बाद ये बहुत ऊंचाई तक जाती है और फिर बेहद तेज गति से लक्ष्य की ओर बढ़ती है.
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दुश्मन के लिए क्यों है मुसीबत?
ब्लू स्पैरो मिसाइल की उड़ान बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी पर डिपेंड होती है, जिससे दुश्मन के लिए इसे रोकना मुश्किल हो जाता है. इसमें आधुनिक नेविगेशन सिस्टम लगा होता है, जिसकी मदद से ये लंबी दूरी से भी सटीक निशाना लगा सकती है. इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसकी स्पीड और सटीकता है. ये बहुत कम समय में लक्ष्य तक पहुंच सकती है. इसके अलावा इसमें एडवांस गाइडेंस सिस्टम होता है जो इसे रास्ते में दिशा सुधारने की क्षमता देता है. इसी वजह से इसे आधुनिक युद्ध में बेहद प्रभावी हथियार माना जाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस तरह के हाई-टेक हथियारों का इस्तेमाल बढ़ता है तो क्षेत्र में संघर्ष और गंभीर हो सकता है.
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