अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आने वाले दिनों में ईरान पर एक बड़ा सैन्य हमला कर सकते हैं. सामने आई ताजा जानकारी के अनुसार, अमेरिका सबसे पहले ईरान पर छोटे हमले करेगा और ईरान को दबाव में लेगा. अगर इन हमलों के बाद वह अपनी परमाणु हथियार महत्वकांक्षा त्याग देता है तो ठीक लेकिन अगर इसके बाद भी ईरान परमाणु हथियार बनाने की जिद करता है तो उसके खिलाफ बड़े हमले किए जाएंगे. हालांकि इससे पहले अमेरिका और ईरान के बीच गुरुवार को जेनेवा में एक बैठक होने वाली है.
क्या है ईरान का अंडरग्राउड एयरबेस ईगल 44
पिछले साल फरवरी में, एक ईरानी टेलीविजन चैनल ने ईरान के एक एयरबेस के बारे में पहली बार जानकारी दी थी और वीडियो फूटेज में इस एयरबेस की कुछ तस्वीरें दिखाई गई थी. इस एयरबेस का नाम ईगल-44 बताया गया, जिसमें अंडरग्राउंड हैंगर कॉम्प्लेक्स दिखाया गया था. यह एयरबेस लड़ाकू जेट और ड्रोन को रखने और अंडरग्राउंड ऑपरेशन शुरू करने के लिए डिजाइन किया गया है.
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आईआरएनए की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ईगल 44, जो जमीन के काफी ज्यादा अंदर बनाया गया है, वहां लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों से लैस लड़ाकू विमान रखे गये हैं. रक्षा और सैन्य विश्लेषण के लिए रिसर्च एसोसिएट (इमेजरी) जोसेफ डेम्पसी ने अपने लेख में ईरान के इस एयरबेस को लेकर कहा है कि 'सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है, कि ये एयरबेस किसी पहाड़ी क्षेत्र में है, जिसमें फाइटर जेट्स की एंट्री के लिए दो दरवाजे हैं. फिलहाल इस एयरबेस में एक रनवे है, जो टैक्सी वे से कनेक्टेड है. बाद में एक रिज के माध्यम से 150 मीटर की सुरंग भी शामिल है.'
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अंडरग्राउंड एयरबेस से ईरान को फायदा
आम तौर पर जमीन के ऊपरी हिस्से पर बनाए गए एयरबेस के मुकाबले अंडरग्राउंड एयरबेस ज्यादा पावरफुल होते हैं. अंडरग्राउंड एयरबेस के जरिए देश अपनी वायुसेना की प्रॉपर्टी को सुरक्षित रख सकती है और इसके साथ ही किसी भी तरह की इमरजेंसी की स्थिति में अपने लड़ाकू विमानों को भी लॉन्च कर सकती है.