US-Iran Ceasefire Inside Story: अमेरिका और ईरान के बीच 2 हफ्ते का सीजफायर कराने के लिए पाकिस्तान अपनी पीठ थपथपा रहा है, लेकिन सीजफायर कराने में अहम भूमिका तो चीन ने निभाई है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपने विदेश मंत्री वांग यी को विशेष दूत बनाकर सीजफायर कराने के लिए मिडिल ईस्ट के देशों में भेजा। वांग यी ने युद्ध पीड़ित खाड़ी देशों के विदेश मंत्रियों से 26 बार फोन पर बात की। तब जाकर ईरान युद्धविराम के लिए राजी हुआ।
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चीन ने सीजफायर के बाद बयान जारी किया
अमेरिका और ईरान में सीफायर के बाद चीन की तरफ से बयान जारी किया गया। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने दुनिया को बताया कि जंग की शुरुआत से ही चीन सीजफायर के लिए प्रयासरत था। राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निर्देश पर विदेश मंत्री वांग यी ने खाड़ी देशों के समकक्षों को 26 फोन किए। मिडिल ईस्ट में शांति और स्थिरता लाने के लिए 5 सूत्रीय प्रस्ताव रखा था। महाशक्ति और जिम्मेदार राष्ट्र होने के नाते चीन का फर्ज है कि वह युद्ध रुकवाए और इसे रुकवाया गया।
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वांग यी ने इन देशों के मंत्रियों के फोन किया
चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने एक मार्च को रूस, 2 मार्च को ओमान, ईरान, फ्रांस, 3 मार्च को इजरायल, 4 मार्च को सऊदी अरब और यूएई, 9 मार्च को कुवैत और बहरीन, 10 मार्च को पाकिस्तान और कतर, 12 मार्च को मिस्र और क्यूबा, 13 मार्च को अफगानिस्तान, 19 मार्च को यूके, 20 मार्च को फ्रांस, 24 मार्च को ईरान, 25 मार्च को मिस्र और तुर्किए, 26 मार्च को कनाडा, 27 मार्च को पाकिस्तान, 2 अप्रैल को बहरीन, सऊदी अरब, जर्मनी और ईयू, 5 अप्रैल को रूस के विदेश मंत्री को फोन किया।
ईरान ने अमेरिका को 10 शर्तों का प्रस्ताव भेजा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि ईरान ने 7 अप्रैल को ही 10 सूत्रीय प्रस्ताव भेजा था। उन्होंने अपने विशेष दूतों से बात करके प्रस्ताव पर चर्चा करने का समय ईरान को दिया और सीजफायर कर ऐलान कर दिया। वहीं सीजफायर की घोषणा के बाद ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने दावा किया कि अमेरिका ने उसके 10 सूत्रीय प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। वहीं सीजफायर ईरान की शर्तों पर हुआ है, जिन्हें मानने के लिए अमेरिका को मजबूर किया गया।