पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबाखामेनेई ने सोमवार 6 अप्रैल 2026 को अमेरिका और इजरायल को कड़ा संदेश दिया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि उनके सैन्य नेताओं की हत्या करके ईरान और उसकी सशस्त्र सेनाओं के हौसलों को पस्त नहीं किया जा सकता. खामेनेई ने जोर देकर कहा कि भले ही हाल के दिनों में ईरानी सैन्य कमांड स्ट्रक्चर को निशाना बनाने की कोशिश की गई है लेकिन इससे देश की युद्धक क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ा है. उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब इजरायली और अमेरिकी हमलों ने ईरानी सैन्य नेतृत्व को भारी नुकसान पहुंचाया है और दोनों देशों के बीच जुबानी जंग अपने चरम पर पहुंच गई है.
बड़े सैन्य कमांडरों की मौत पर बवाल
इजरायली सेना की ओर से दावा किया गया है कि सोमवार को हुए ताजा हमलों में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी के दो बड़े अधिकारी मारे गए हैं. इनमें वरिष्ठ खुफिया अधिकारी माजिद खादेमी और कुद्स फोर्स के स्पेशल ऑपरेशन कमांडर असगर बाघेरी का नाम शामिल है जो ईरान की सैन्य रणनीति के महत्वपूर्ण स्तंभ माने जाते थे. इजरायली सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल नदाव शोशानी के अनुसार बाघेरी वही शख्स थे जिन्होंने सीरिया और लेबनान में इजरायली और अमेरिकी ठिकानों पर हमलों की योजना बनाई थी. इन हत्याओं ने ईरान को गहरे संकट में डाल दिया है लेकिन मुज्तबा खामेनेई ने साफ कर दिया है कि ईरान अपने मिलिट्री सिस्टम और जवाब देने की ताकत को कम नहीं होने देगा.
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ट्रंप की धमकी का दिया जवाब
ईरानी सुप्रीम लीडर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस धमकी की भी कड़ी निंदा की है जिसमें ट्रंप ने ईरान को ‘पाषाण युग’ में वापस धकेलने की बात कही थी. खामेनेई ने कहा कि दुश्मन बड़ी लापरवाही से तबाही और बर्बादी की बातें कर रहा है जो उनकी मानसिकता को दर्शाता है. उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर आरोप लगाया कि वे जानबूझकर ईरान के स्कूलों, पुलों और पावर प्लांट्स जैसे नागरिक ठिकानों को निशाना बना रहे हैं. उनके मुताबिक इस तरह के हमले युद्ध की मर्यादाओं के खिलाफ हैं और इन्हें इंसानियत के विरुद्ध किया गया एक गंभीर अपराध माना जाना चाहिए. खामेनेई ने ट्रंप के बयानों को केवल गीदड़ भभकी करार देते हुए कहा कि ईरान अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है.
अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की चुप्पी पर सवाल
खामेनेई ने अपने संबोधन में संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भूमिका पर भी तीखे सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने अफसोस जताया कि जब दुनिया में युद्ध और तबाही का डंका इतनी जोर से पीटा जा रहा है तब ये संस्थाएं खामोश बैठकर तमाशा देख रही हैं. सुप्रीम लीडर के अनुसार इन संस्थाओं की चुप्पी उन्हें आक्रामक देशों का सहभागी बनाती है और यह वैश्विक शांति के लिए एक बड़ा खतरा है. ईरान अब इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने के साथ-साथ अपनी रक्षात्मक तैयारियों को और मजबूत करने में जुट गया है. वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए यह साफ है कि ईरान और अमेरिका के बीच का यह संघर्ष आने वाले दिनों में और भी ज्यादा उग्र रूप ले सकता है.
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