पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ जारी जनआक्रोश ने बेहद हिंसक रूप ले लिया है. मंगलवार को रावलकोट में ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) की ओर से आयोजित मार्च के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध गोलीबारी कर दी. आयोजकों और चश्मदीदों के मुताबिक, इस गोलीबारी में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई है और दर्जनों अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं.
वार्ता विफल होने के बाद निकाला गया मार्च
PoK में राजनीतिक व आर्थिक सुधारों, बढ़ती महंगाई, बिजली कटौती, बेरोजगारी और स्थानीय अधिकारों की मांग को लेकर JAAC और पाकिस्तानी अधिकारियों के बीच बातचीत विफल हो गई थी. इसके बाद रविवार को मीरपुर संभाग से मार्च की शुरुआत हुई, जो रावलकोट होते हुए राजधानी मुजफ्फराबाद की ओर बढ़ रहा था.
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JAAC के मुताबिक, हिंसा के बावजूद कारवां रावलकोट पहुंच गया. मारे गए 20 लोगों में से 19 की पहचान की पुष्टि हो चुकी है, जबकि सिर में गोली लगने से मारे गए 20वें व्यक्ति की पहचान दस्तावेज न मिलने के कारण नहीं हो सकी है. घायल कई लोगों की स्थिति नाजुक बनी हुई है, जिससे मौतों का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका है.
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सेना ने बरसाए बम-गोले और गोलियां
चश्मदीदों और स्थानीय संगठनों का आरोप है कि चांदनी चौक और द्रेक ईदगाह पर एकत्र हुए भारी जनसमूह को तितर-बितर करने के लिए पाकिस्तानी सेना, रेंजर्स और पुलिस ने सीधे एलएमजी और लाइव कारतूस, भारी शेलिंग और आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया.
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यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी ने इस हिंसक कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है. UKPNP ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार निकायों से तत्काल हस्तक्षेप करने और पाकिस्तान को घातक बल का प्रयोग रोकने के लिए मजबूर करने की अपील की है.
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स्थानीय चुनावों के बहिष्कार के बीच भड़की हिंसा
स्थानीय मीडिया और प्रदर्शनकारी समूहों का कहना है कि यह हिंसा JAAC द्वारा स्थानीय चुनावों के बहिष्कार के आह्वान के बीच हुई. आरोप है कि सुरक्षा बलों ने खुद पोलिंग स्टेशनों पर जाकर फर्जी वोटिंग कराने का प्रयास किया. जनता महंगाई, बिजली संकट और बुनियादी अधिकारों को लेकर सरकार से बेहद नाराज है. पूरे इलाके में कर्फ्यू और इंटरनेट ब्लैकआउट लागू कर दिया गया है.
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