इधर, बिहार में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान शुरू हो गए। वहीं भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में कुछ ही महीने में राष्ट्रीय संसदीय चुनाव होने हैं। इसके लिए राजनीतिक पार्टियों ने प्रचार शुरू कर दिया है। 6 नवंबर को बांग्लादेश में एक प्रचार के दौरान काफी हिंसा हो गई। देश में कई जगह हिंसा भड़की है। हिंसा इतनी बढ़ गई कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के प्रत्याशी को गोली मार दी गई। वहीं एक अन्य उम्मीदवार के घर में आग लगा दी गई।

चटगांव में चुनाव प्रचार के दौरान बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के उम्मीदवार इरशाद उल्लाह एक अभियान कार्यक्रम में थे। इस दौरान हमलावरों ने उनपर फायरिंग कर दी। मामले में अंतरिम सरकार ने हमले की निंदा की है। अंतरिम सरकार ने एक बयान में कहा कि चटगांव मेट्रोपॉलिटन पुलिस (सीएमपी) की तत्काल जांच से पता चलता है कि इरशाद उल्लाह हमले का निशाना नहीं थे, बल्कि एक आवारा गोली लगने से वे घायल हो गए। सरकार उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करती है। पूरी जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

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वहीं मध्य कोमिला जिले से बीएनपी के नामांकन आकांक्षी सांसद उम्मीदवार मोनोवर सरकार ने आरोप लगाया है कि उनके घर को बदमाशों ने आग लगा दी। बीएनपी ने छात्र संघ चुनाव में जमात समर्थित छात्र शाखा की जीत के बाद चुनावी माहौल खराब करने के लिए जमात-ए-इस्लामी को जिम्मेदार ठहराया है। उत्तरी नेत्रकोना में बीएनपी द्वारा नामित सांसद उम्मीदवार अनवारुल हक ने बताया कि डीयूसीएसयू, आरयूसीएसयू और सीयूसीएसयू के चुनाव के बाद, उन्होंने (जमात ने) पूरे देश में माहौल बनाया, वे देश में अगली सरकार होंगे। लेकिन हमें लगता है कि हमारे बांग्लादेशी लोग मध्यम धार्मिक हैं, लेकिन वे धर्म की चरमपंथी गतिविधियों में शामिल नहीं होते हैं।

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अनवारुल हक ने कहा कि जमात-ए-इस्लामी और अन्य तथा सरकार के कुछ सलाहकार और अन्य विदेशी हितधारकों ने भी आगामी चुनाव में प्रतिकूल माहौल पैदा किया है।

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