ईरान के खिलाफ हवाई हमलों के बाद अब अमेरिका की डोनाल्ड ट्रंप सरकार तेहरान पर जमीनी कार्रवाई करने का प्लान बना रही है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक, व्हाइट हाउस में हुई एक अहम बैठक में तीन विकल्पों पर चर्चा हुई, जिसमें से एक जमीनी स्तर पर सैन्य कार्रवाई का भी ऑप्शन रखा गया है. अमेरिका का प्लान ईरान के सबसे बड़े तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर सेना द्वारा कब्जा जमाने का है. इसके अलावा पिकैक्स माउंटेन परिसर पर बमबारी और ऊर्जा संयंत्रों पर हवाई हमलों का दायरा बढ़ाने का भी विकल्प रखा गया है.

किसी और देश की मदद ले सकता है अमेरिका


हालांकि खुद ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि खार्ग द्वीप पर ग्राउंड ऑपरेशन अमेरिकी सेना की बजाय किसी सहयोगी देश के जरिए चलाया जा सकता है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने हाल ही में खार्ग द्वीप की ओर बढ़ रहे कुराकाओ ध्वज वाले तेल टैंकर को चेतावनी के बावजूद निर्देश न मानने पर हमला कर उन्हें तबाह कर दिया. इसके साथ ही बीते दिनों अमेरिका ने ईरान पर समुद्री नाकेबंदी फिर से लागू करने का ऐलान किया, जिसके तहत अब तक कई जहाजों को रोका और मोड़ा जा चुका है.

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ईरान पर अमेरिका का जोरदार हमला


दूसरी ओर, ईरान के शहर अहवाज में हुए हमले के दौरान शहीद बघई अस्पताल से मरीजों और उनके परिजनों को बाहर निकाला गया. ये अस्पताल बच्चों के कैंसर के इलाज के लिए जाना जाता है और स्थानीय मीडिया के मुताबिक गंभीर ईलाज करा रहे मरीज भी इस हमले से प्रभावित हुए. अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया.

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ईरान ने भी किया पलटवार


ईरान ने कुवैत में अरिफजान और अली अल सलेम, और बहरीन में जुफैर और शेख ईसा बेस पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए. इन हमलों के बाद दोनों देशों में सायरन की आवाज गूंज उठी और नागरिकों को सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी गई. कुवैत ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है. ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक हालिया दिनों में हुए हमलों में दर्जनों लोग हताहत हुए हैं.

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