अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर आर्थिक युद्ध का नया मोर्चा खोल दिया है. चीन और ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य की नौसैनिक नाकेबंदी करने की धमकी दी है. सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उन्होंने कहा कि वे जल्द ही इस रास्ते से गुजरने वाले उन जहाजों को रोकेंगे जो अवैध टैक्स दे रहे हैं. दरअसल अमेरिका की असली चिंता चीनी युआन का बढ़ता इस्तेमाल है जो दशकों पुराने पेट्रोडॉलर सिस्टम को चुनौती दे रहा है. इस कदम से वाशिंगटन ने खुद को सीधे तौर पर उन दो देशों के सामने खड़ा कर लिया है जो अमेरिकी दबाव को बेअसर करने की ताकत दिखा चुके हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नाकेबंदी की धमकी का गहरा असर भारत पर पड़ सकता है. चीन और ईरान को आर्थिक चोट पहुंचाने के लिए ट्रंप इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को बंद करना चाहते हैं ताकि चीनी युआन के इस्तेमाल को रोका जा सके. भारत के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है क्योंकि हमारी ऊर्जा सुरक्षा का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है. अगर ट्रंप अपनी इस धमकी पर अमल करते हैं तो भारत के लिए खाड़ी देशों से होने वाली सप्लाई पूरी तरह ठप हो सकती है जिसका सीधा असर हमारी अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.

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तेल तो मिल जाएगा लेकिन गैस कहां से आएगी?

भारत ने रूस जैसे देशों से कच्चा तेल खरीदने के वैकल्पिक रास्ते तो निकाल लिए हैं लेकिन एलपीजी और अन्य गैसों के मामले में हम अब भी होर्मुज रूट पर निर्भर हैं. भारत की ज्यादातर एलपीजी और प्राकृतिक गैस का इम्पोर्ट इसी रास्ते से होता है इसलिए इसकी नाकेबंदी देश में गंभीर गैस संकट पैदा कर सकती है. घरों के किचन से लेकर बड़ी फैक्ट्रियों तक गैस की किल्लत हाहाकार मचा सकती है क्योंकि गैस के लिए हमारे पास फिलहाल कोई दूसरा मजबूत विकल्प तैयार नहीं है. ट्रंप का यह फैसला भारत जैसे मित्र देश के लिए एक बड़ी ऊर्जा चुनौती बन सकता है जिसे संभालना आसान नहीं होगा.

महंगाई की मार और आम आदमी की जेब

होर्मुज जलडमरूमध्य में जरा सी भी हलचल होने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतें रॉकेट की तरह ऊपर भागने लगती हैं. अगर सप्लाई चेन बाधित हुई तो केवल गैस ही नहीं बल्कि खाद और अन्य जरूरी सामानों की कीमतें भी दोगुनी हो सकती हैं जिससे आम आदमी की थाली महंगी हो जाएगी. अमेरिका में भी डीजल की कीमतें बढ़ रही हैं जिसका असर पूरी दुनिया की लॉजिस्टिक्स कॉस्ट पर पड़ रहा है. भारत जैसे विकासशील देश के लिए बढ़ती महंगाई आर्थिक विकास की रफ्तार को धीमा कर सकती है और भविष्य में बड़े आर्थिक मंदी का कारण बन सकती है.