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US Russia Sanctions Bill: अमेरिकी सीनेट ने किया रूस प्रतिबंध बिल पास, भारत पर 100% टैरिफ का खतरा; जानिए क्यों है भारत के लिए टेंशन की बात

अमेरिकी सीनेट ने रूस प्रतिबंध बिल को मंजूरी दी है, जिससे रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का रास्ता साफ हो सकता है. इस फैसले के सामने आने के बाद भारत के लिए भी चिंता पैदा हो गई है.

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अमेरिका से भारत को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है. बता दें कि अमेरिकी सीनेट ने रूस से जुड़े एक प्रतिबंध बिल को मंजूरी दे दी है. इस फैसले के सामने आने के बाद भारत के लिए भी चिंता पैदा हो गई है, क्योंकि इस बिल के पास होने के कारण भारत पर 100 फीसदी तक का टैरिफ लगाया जा सकता है.

क्या भारत पर लगेगा 100 फीसदी टैरिफ?

बता दें कि इस विधेयक में अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रावधान है, जो बड़े पैमाने पर रूसी तेल और गैस की खरीद जारी रखते हैं. इस लिस्ट में भारत और चीन जैसे प्रमुख देश भी शामिल हैं. हालांकि, यह विधेयक अभी कानून नहीं बना है. इसके लागू होने से पहले सीनेट की आगे की प्रक्रिया, प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) की मंजूरी और फिर इस पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर भी होंगे.

बिल को दिवंगत सीनेटर लिंडसे ने किया था तैयार

मिली जानकारी के अनुसार, इस कानून को दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने तैयार किया था. इसे मंगलवार (28 जुलाई) को पास किया गया था. यह प्रस्ताव रूस की ऊर्जा आय को सीमित करने की अमेरिकी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. यूक्रेन युद्ध के बीच पश्चिमी देशों का मानना है कि रूस की तेल और गैस बिक्री से होने वाली कमाई युद्ध को जारी रखने में मदद कर रही है. इसी कारण अमेरिका ऐसे देशों पर भी आर्थिक दबाव बनाने की तैयारी कर रहा है, जो रूस से ऊर्जा आयात कर रहे हैं. पहले इस तरह के प्रस्ताव में 500 फीसदी तक टैरिफ का प्रावधान था, लेकिन संशोधित बिल में इसे घटाकर अधिकतम 100 फीसदी कर दिया गया है.

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खबर अपडेट की जा रही है…वहीं, रूस से कच्चा तेल चीन के बाद भारत ही सबसे ज्यादा खरीदता है. इस बिल को पास करने के लिए वोटिंग भी कराई गई थी जिसमें इसके पक्ष में 86 वोट और विपक्ष में 12 वोट पड़े.

भारत खरीदता है रूस से सस्ता तेल

भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले कुछ सालों में भारत ने काफी सस्ती दरों पर रूसी कच्चे तेल का आयात बढ़ा दिया है. इससे देश को ऊर्जा लागत नियंत्रित रखने में भी मदद मिली है. लेकिन अब अगर यह कानून प्रभावी होता है और भारत पर टैरिफ लगाया जाता है, तो अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात पर इसका असर साफ दिखाई देगा. इससे फार्मा, इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल और अन्य निर्यात-आधारित क्षेत्रों पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.

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भारत पर पहले ही लग चुका है 10 फीसदी टैरिफ

अमेरिका ने बंधुआ मजदूरी से निर्मित वस्तुओं के आयात पर सख्ती बढ़ाते हुए भारत समेत 17 देशों से आने वाले कुछ उत्पादों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने का फैसला किया है.

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पिछले महीने अमेरिकी प्रशासन ने व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत प्रस्तावित शुल्क सूची में भारत को 12.5 प्रतिशत टैरिफ वाले देशों में शामिल किया था. हालांकि, बाद में भारत द्वारा विदेश व्यापार नीति में किए गए संशोधनों और बंधुआ मजदूरी से तैयार वस्तुओं के आयात पर नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों को देखते हुए अमेरिका ने प्रस्तावित शुल्क घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया था.

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लेखक के बारे में

Versha Singh

वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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