अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य इतिहास के सबसे बड़े और जोखिम भरे रेस्क्यू ऑपरेशन की रोमांचक कहानी दुनिया के सामने रखी है. उन्होंने बताया कि 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के दौरान ईरान की सीमा के भीतर एक अमेरिकी एफ-15 फाइटर जेट दुश्मन की फायरिंग का शिकार होकर गिर गया था. इस विमान में सवार दो क्रू मेंबर्स दुश्मन के इलाके में अलग-अलग जगहों पर जा गिरे थे जिससे उनकी जान पर बड़ा खतरा मंडरा रहा था. ट्रंप ने स्पष्ट किया कि हालांकि एक-दो सैनिकों को बचाने के लिए सैकड़ों सैनिकों की जान जोखिम में डालना बहुत कठिन फैसला था लेकिन अमेरिकी सेना का सिद्धांत है कि वे अपने किसी भी नागरिक को पीछे नहीं छोड़ते. इसी संकल्प के साथ उन्होंने अपनी सेना को आदेश दिया कि पायलटों को वापस लाने के लिए जो भी जरूरी हो वह तुरंत किया जाए.

पहाड़ों में छिपे घायल अधिकारी की जंग

रेस्क्यू टीम ने पहले पायलट को तो कुछ ही घंटों में एक हेलीकॉप्टर की मदद से सुरक्षित बाहर निकाल लिया था लेकिन दूसरा क्रू मेंबर जो एक वेपन सिस्टम ऑफिसर था वह काफी दूर जा गिरा था. वह अधिकारी गंभीर रूप से घायल था और उस इलाके में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड और स्थानीय उग्रवादी गुट सक्रिय थे जो उसकी तलाश कर रहे थे. अपनी ट्रेनिंग का इस्तेमाल करते हुए उस घायल जांबाज ने खुद अपना इलाज किया और दुश्मनों से बचने के लिए ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियों पर चढ़ गया. उसने एक खास लोकेशन ट्रांसमीटर डिवाइस के जरिए अमेरिकी सेना को अपनी सही जगह की जानकारी भेजी और करीब 48 घंटे तक मौत से लड़ता रहा. ट्रंप ने इस अधिकारी के साहस की सराहना करते हुए बताया कि वह बेहद कठिन परिस्थितियों में भी डटा रहा.

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155 विमानों का ऐतिहासिक जमावड़ा

जब घायल अधिकारी की लोकेशन मिल गई तो उसे निकालने के लिए अमेरिका ने अपनी पूरी सैन्य ताकत झोंक दी और एक विशाल रेस्क्यू मिशन शुरू किया. इस ऐतिहासिक ऑपरेशन में कुल 155 एयरक्राफ्ट शामिल थे जिनमें 4 खतरनाक बॉम्बर, 64 फाइटर जेट, 48 रिफ्यूलिंग टैंकर और 13 रेस्क्यू एयरक्राफ्ट तैनात किए गए थे. दुश्मन को भ्रम में डालने के लिए अमेरिकी सेना ने कई जगहों पर फर्जी टीमें एक्टिव दिखाईं ताकि असली लोकेशन का पता न चल सके. भारी गोलीबारी के बीच अमेरिकी विमानों ने बेहद कम ऊंचाई पर उड़ान भरी और सटीक निशाना साधते हुए दुश्मन के घेरे को तोड़ दिया. यह ऑपरेशन करीब 7 घंटे तक चला जिसमें अमेरिकी जांबाज बिना किसी बड़े नुकसान के अपने साथी को सुरक्षित निकाल लाए.

तकनीक की सुरक्षा और बड़ी कामयाबी

राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि इस मिशन के दौरान कुछ भारी विमानों को वापस लाना संभव नहीं था क्योंकि वे गीली रेत वाले खेत में फंस गए थे जहां कोई रनवे नहीं था. ऐसे में सेना ने अपनी टॉप सीक्रेट तकनीक को दुश्मन के हाथ लगने से बचाने के लिए उन उपकरणों और विमानों को वहीं नष्ट कर दिया. इसके बाद हल्के और तेज विमानों की मदद से सभी सैनिकों को वहां से सुरक्षित बाहर निकाला गया जो एक बेहतरीन बैकअप प्लान का नतीजा था. ट्रंप के अनुसार पिछले 37 दिनों में अमेरिका ने ईरान पर 10,000 से ज्यादा उड़ानें भरी हैं लेकिन यह पहली बार था जब कोई विमान गिरा. उन्होंने इस सफल रेस्क्यू को सीआईए और सेना की एक बड़ी जीत बताया जिसने साबित कर दिया कि अमेरिका अपने लोगों के लिए किसी भी हद तक जा सकता है.