US Iran Tension: अमेरिका और ईरान के बीच 6 फरवरी को ओमान की राजधानी मस्कट में शांति वार्ता हुई, जिसमें कुछ मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच सकारात्मक चर्चा हुई। दोनों पक्ष अप्रत्यक्ष रूप से परमाणु समझौते के लिए वार्ता जारी रखने पर सहमत हुए हैं। इसके बाद अगले दिन 7 फरवरी को अमेरिका ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगा दिए, लेकिन ईरान ने नए प्रतिबंधों पर आपत्ति जताई है और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को कड़े और साफ-साफ शब्दों में चेतावनी दी है।
अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर हमले की धमकी
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का कहना है कि अमेरिका के साथ अगले दौर की बातचीत की तारीख फाइनल नहीं हुई है, पर बातचीत इसी हफ्ते हो सकती है, लेकिन अगले दौर की बातचीत से पहले अमेरिका को स्पष्ट करना चाहूंगा कि ईरान को अमेरिका के नए प्रतिबंध स्वीकार नहीं हैं। ऐसे में अगर अमेरिका ने ईरान पर हमला किया तो अमेरिका के मध्य पूर्व देशों में बने सैन्य ठिकानों पर हमला किया जाएगा। यह धमकी ट्रंप की टेंशन बढ़ाने वाली है।
अमेरिका पर हमला न माना जाए खुद पर हमला
ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर अमेरिका के हमले के बदले ईरान दूसरे देशों में बने उसके सैन्य ठिकानों पर हमला करेगा तो यह अमेरिका न हमला होगा, न कि संबंधित देश पर, इसलिए मध्य पूर्व के देश उसे खुद पर हुआ हमला न लें। अराघची का ओमान की राजधानी मस्कट में तेहरान और वॉशिंगटन के बीच शुरू हुई शांति वार्ता के पहले दौर के बाद मीडिया से बात करते हुए यह बयान दिया और अमेरिका को धमकी भी दी।
अमेरिका की मिसाइल प्रोग्राम बंद करने की मांग
बता दें कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्य पूर्व के देशों में अमेरिकी नौसैनिकों की तैनाती बढ़ा दी है और अब ईरान पर हमला करने की धमकी दी है. उन्होंने ईरान से यूरेनियम की प्रोसेसिंग बंद करने की मांग की है, क्योंकि इससे इस्तेमाल से परमाणु हथियार बनाए जा सकते हैं। अमेरिका ने ईरान से मांग की है कि वह अपना बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम भी बंद कर दे, क्योंकि इससे आतंकी संगठनों को समर्थन नहीं मिलेगा और वे कमजोर पड़ जाएंगे।