इसरायली वायुसेना ने ईरान के पश्चिमी हिस्से में 400 से अधिक ईरानी आतंकी ढांचों पर हमले किए. आईडीएफ ने बयान जारी कर कहा, “वायुसेना अभी पश्चिमी ईरान में हमला कर रही है: ईरानी आतंकी शासन के 400 से ज्यादा बुनियादी ढांचे नष्ट किए गए. एक लांच पोजीशन की ओर जा रही रक्षा प्रणाली को निशाना बनाया गया.”
आईडीएफ के अनुसार, “पूरे दिन विभिन्न क्षेत्रों में ईरानी आतंकी शासन के 400 से अधिक निशानों पर असंख्य हथियार गिराए गए. इनमें बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर व बिना पायलट वाले हवाई यानों के भंडारण स्थल शामिल थे. हमलों के दौरान हारुद क्षेत्र में ईरानी आतंकी शासन की एक रक्षा प्रणाली ले जा रहे ट्रक को पहचाना गया, जो उसे ईरान के दूसरे इलाके में ले जाई जा रही थी. पहचान के बाद ट्रक पर हमला कर ईरानी रक्षा प्रणाली को ध्वस्त कर दिया गया.”
इराक सरकार और स्वायत्त कुर्दिस्तान क्षेत्र ने स्पष्ट किया है कि इराक को पड़ोसी देशों पर हमलों का आधार नहीं बनने दिया जाएगा. ईरानी कुर्द उग्रवादियों के ईरान में घुसपैठ की खबरों के बाद यह बयान आया है. प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी व कुर्दिस्तान क्षेत्र के राष्ट्रपति नेचिरवान बरजानी ने फोन पर सहमति जताई कि “इराकी धरती का इस्तेमाल पड़ोसी देशों पर हमलों के लिए लॉन्चिंग पॉइंट के रूप में नहीं होगा.”
प्रधानमंत्री कार्यालय के मीडिया स्टेटमेंट के अनुसार, दोनों नेताओं ने इस मुद्दे पर एकमत होते हुए इराक की संप्रभुता पर जोर दिया. दूसरी ओर, ईरान ने शुक्रवार को चेतावनी जारी की कि यदि निर्वासित ईरानी कुर्द उग्रवादी इराकी कुर्दिस्तान से ईरानी क्षेत्र में प्रवेश करते हैं, तो वह कुर्दिस्तान के “सभी प्रतिष्ठानों” को निशाना बनाएगा.
श्रीलंका के दक्षिण में IRIS DENA की घटना से कुछ दिन पहले ईरान ने भारत से अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू के लिए IRIS LAVAN जहाज को लेने का आग्रह किया था, जो क्षेत्र में मौजूद था. 28 फरवरी 2026 को मिले इस अनुरोध के जवाब में कहा गया कि इसे कोच्चि में डॉकिंग की तत्काल जरूरत है क्योंकि जहाज में तकनीकी खराबी आ गई थी. 1 मार्च को IRIS LAVAN को अनुमति मिली और 4 मार्च को कोच्चि पहुंचा, जहां इसके 183 सदस्यीय चालक दल को इस वक्त नौसेना सुविधाओं में ठहराया गया है.
ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी जंग रुकने का कोई संकेत नजर नहीं आ रहा है. इस बीच ईरान भी झुकने को तैयार नहीं है. शुक्रवार को तेहरान की तरफ से कुवैत में स्थित अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाया गया. ईरान ने कई मिसाइलें दागी.
ईरान ने धमकी दी है कि अगर आतंकवादी देश में प्रवेश करते हैं तो वह इराकी कुर्दिस्तान को निशाना बनाएगा.
ईरान की रक्षा परिषद के एक पत्र का हवाला देते हुए मेहर समाचार एजेंसी ने बताया, “अभी तक केवल अमेरिका और इज़राइल के ठिकानों और क्षेत्र में मौजूद अलगाववादी समूहों को ही निशाना बनाया गया है.” इसमें चेतावनी दी गई है कि अगर ईरान में आतंकवादियों की “लगातार मौजूदगी, साजिश और प्रवेश” की अनुमति दी गई, तो “इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र की सभी सुविधाओं को बड़े पैमाने पर निशाना बनाया जाएगा.”
अजरबैजान ने तेहरान में अपने दूतावास और तर्बेज में वाणिज्य दूतावास से कर्मचारियों को वापस बुलाने की घोषणा की है. राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव के आदेश पर यह कदम सुरक्षा कारणों से उठाया गया है. Nakhchivan एन्क्लेव में ईरान से गुरुवार को दागे गए चार ड्रोन हमलों के बाद यह फैसला लिया गया | इसमें जिसमें चार नागरिक घायल हुए और हवाई अड्डे सहित नागरिक ढांचे को नुकसान पहुंचा. ईरान ने हमलों की जिम्मेदारी से इनकार किया है, लेकिन ‘आर्मेनिया-अजरबैजान तनाव और इजरायल-अमेरिका के साथ आजरबैजान के संबंधों से ईरान नाराज है.
ईरान के लोरिस्तान प्रांत के प्रमुख शहर खोरमाबाद में शुक्रवार को जुमे की नमाज के दौरान इमाम ने पारंपरिक धार्मिक वस्त्रों के बजाय ईरानी सैन्य वर्दी पहनकर खुतबा सुनाया. मध्य पूर्व में जारी तनावपूर्ण स्थिति के बीच सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है. खुतबे के दौरान इमाम ने क्षेत्रीय सुरक्षा, इस्लामी प्रतिरोध और दुश्मनों के खिलाफ एकजुटता पर जोर दिया.
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, तीन अमेरिकी ड्रोन मार गिराए गए.
अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि तीन अमेरिकी एमक्यू-9 रीपर ड्रोन मार गिराए गए हैं. यह स्पष्ट नहीं है कि ड्रोन ठीक कहां गिरे, हालांकि उनमें से एक ने ईरान के तट के पास गिरने की कोशिश की थी. अधिकारियों ने यह भी कहा कि ड्रोन कैसे गिराए गए या इसके लिए कौन जिम्मेदार है, यह अभी स्पष्ट नहीं है. सीबीएस न्यूज़ के अनुसार, एक अलग घटना में, हाल ही में एक और एमक्यू-9 रीपर ड्रोन को मार गिराया गया, जिसे अधिकारियों का मानना है कि कतरी सेना की ओर से गलती से हुई गोलीबारी थी.
विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि मध्य पूर्व में युद्ध के लगातार बढ़ते प्रकोप के चलते इंडोनेशिया ने ईरान से अपने दर्जनों नागरिकों को निकालना शुरू कर दिया है. अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और ईरान द्वारा पूरे क्षेत्र में किए गए जवाबी हमलों के कारण हजारों विदेशी नागरिक फंसे हुए हैं, क्योंकि उड़ानें रद्द हो गई हैं और हवाई क्षेत्र बंद कर दिया गया है. इनमें ईरान में मौजूद 329 इंडोनेशियाई नागरिक भी शामिल हैं, जिनमें से अधिकांश कोम शहर में रहने वाले छात्र हैं.
अमेरिका-ईरान युद्ध: इजरायल द्वारा बेरूत में नए सिरे से हमले शुरू करने पर संयुक्त राष्ट्र ने कहा, ‘लेबनान एक प्रमुख तनाव का केंद्र बनता जा रहा है. हिज़्बुल्लाह द्वारा इजरायल पर किए गए हमलों और इजरायल के भारी जवाबी हमलों के बाद उत्पन्न नवीनतम घटनाक्रमों, साथ ही इजरायल द्वारा जारी व्यापक विस्थापन आदेशों, जिनके कारण पहले ही लाखों लोग अपने घरों से भागने को मजबूर हो चुके हैं, से मैं अत्यंत चिंतित और भयभीत हूं. मैं शत्रुता को तत्काल समाप्त करने का आह्वान करता हूं.’ उन्होंने आगे कहा, ‘नागरिकों के लिए और अधिक आतंक और विनाश को रोकने के लिए हमें समझदारी से काम लेना होगा. हम और अधिक विस्फोटक स्थिति पैदा होने का जोखिम नहीं उठा सकते.’
ईरान ने बहरीन की राजधानी मनामा में इजरायली दूतावास पर हमला किया। शहर के फाइनेंशियल हार्बर टावर्स कमर्शियल कॉम्प्लेक्स को भी निशाना बनाया। कॉम्प्लेक्स पर हमला इसलिए किया गया है, क्योंकि इसके अंदर इजरायली दूतावास है। कॉम्प्लेक्स के आस-पास एक ईरानी ड्रोन को पकड़का नष्ट कर दिया गया।
सेंट्रल तेहरान में ईरान की सेना की एक मिलिट्री एकेडमी पर इजरायल ने हमला किया है। यह हमला तब हुआ, जब सरकारी ब्रॉडकास्टर का एक रिपोर्टर उस जगह के पास लाइव रिपोर्टिंग कर रहा था।
ईरान युद्ध की वजह से आर्थिक दबाव और खाड़ी के देशों के द्वारा अनुबंधों और प्रोजेक्टों की समीक्षा के तहत सऊदी ने घोषणा की है कि वह 500 अरब डॉलर के सार्वजनिक निवेश कोष (PIF) के तहत यूरोप और अमेरिका में 100 अरब डॉलर के निवेशों का दोबारा आकलन करेगा। UAE ने Dubai Expo Projects और London Property Deals पर रोक लगा दी है।
कतर ने Football World Cup स्पॉन्सरशिप्स को स्थगित करने का संकेत दिया है। कुवैत के वित्त मंत्रालय ने कहा है कि रक्षा बजट 40% बढ़ाना पड़ा है जो विदेश में उसकी परिसंपत्तियों को प्रभावित करेगा। जानकारों का मानना है कि यह कदम खाड़ी की Vision2030 योजनाओं को पटरी से उतार सकता है, क्योंकि युद्ध लंबा खिंचने पर आर्थिक मंदी गहरा सकती है।
सऊदी अरब, UAE, कतर और कुवैत समेत प्रमुख खाड़ी देश ईरान युद्ध के कारण अपनी वित्तीय स्थिति पर दबाव महसूस कर रहे हैं। OPEC के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार Hormuz जलडमरूमध्य से दैनिक 20 मिलियन बैरल तेल का पारगमन प्रभावित हुआ है, जिससे खाड़ी देशों की तेल राजस्व में 25-30% की कमी आई है। मिसाइल हमलों, होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल शिपिंग में बाधा, ऊर्जा आय में गिरावट, पर्यटन हानि और रक्षा खर्चों में वृद्धि ने इन देशों को विदेशी निवेश, अनुबंधों और प्रायोजन सौदों की पुनर्समीक्षा के लिए मजबूर कर दिया है।
ईरान: जंग शुरू होने से अब तक कम से कम 1,230 लोग मारे गए हैं
इजराइल: अब तक 10 आम लोग मारे गए
लेबनान: इजराइली हमलों में 102 लोग मारे गए
बहरीन: मिसाइल इंटरसेप्शन के बाद आग लगने से एक व्यक्ति की मौत
कुवैत: ईरानी हमलों में दो कुवैती सैनिकों समेत तीन लोग मारे गए
ओमान: एक व्यक्ति की मौत
UAE: तीन लोग मारे गए
अमेरिका:US सेंट्रल कमांड के मुताबिक, कुवैत में एक फैसिलिटी पर हुए हमले में 6 US सर्विस मेंबर मारे गए
सीरिया: ईरानी मिसाइल गिरने से चार लोग मारे गए
इराक: कम से कम 13 लोग मारे गए
कुवैत पर ईरानी मिसाइलों का एक और भीषण हमला हुआ है। ईरान ने अली अल सलेम एयरबेस को निशाना बनाया है, जहां की सैटेलाइट तस्वीरें भारी नुकसान की गवाही दे रही हैं। यह एयरबेस कुवैत एयरफोर्स और अमेरिका की 386th Air Expeditionary Wing द्वारा संचालित है। यह हवाई ईंधन भरने, सैनिकों की आवाजाही और रसद का प्रमुख केंद्र है। हमले में रनवे क्षतिग्रस्त हुआ है। इसी बेस पर कुवैत एयर फोर्स का फ्लाइट ट्रेनिंग स्कूल भी है।
अमेरिकी संसद के निचले सदन ने उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है जो युद्ध लड़ने और उससे जुड़े आदेश पारित करने के राष्ट्रपति Trump की शक्तियों को सिमित करता है। ट्रंप समर्थकों को 219 वोट मिले, जबकि उनके खिलाफ 212 वोट पड़े। War Power Resolution 1973 के तहत पेश किया प्रस्ताव पहले सीनेट में खारिज हो चुका था।
मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग में ब्रिटेन भी शामिल हो गया है। ब्रिटेन का कहना है कि वह रक्षात्मक भूमिका में रहेगा। ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने की शुक्रवार की घोषणा के अनुसार की वह कतर में 4 अतिरिक्त RAF टाइफून भेज रहा है, जो क्षेत्र में रक्षात्मक अभियानों का समर्थन करेंगे। यह विमान जनवरी में तैनात UK-Qatar Joint Typhoon Squadron के मौजूदा जेटों के अतिरिक्त हैं, जिन्हें क्षेत्रीय सुरक्षा मजबूत करने और ब्रिटिश नागरिकों और हितों की रक्षा के लिए भेजा गया था। मंत्रालय ने स्पष्ट संदेश दिया कि ब्रिटेन अपने सहयोगियों के साथ खड़ा रहेगा और अपने लोगों और हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा।
ईरान से युद्ध के बीच इजरायली सेना ने हिजबुल्लाह को खत्म करने पर भी ध्यान केंद्रित कर रखा है। लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी दाहियेह में हिजबुल्लाह के बुनियादी ढांचे पर एक के बाद एक हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। यह हमले हिजबुल्लाह के सैन्य ठिकानों और हथियार भंडारण सुविधाओं को लक्षित कर हो रहे हैं।
4 मार्च को सीरिया के दमिश्क के पास इजरायली हमले में हिजबुल्लाह के वरिष्ठ कमांडर अबू अली मलिक की मौत हो चुकी है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा कि हिजबुल्लाह के खतरों को समाप्त करने के लिए कार्रवाई जारी रहेगी। जब तक वह ईरान का साथ देता रहेगा, इजरायल हमला करता रहेगा।
अमेरिका के ऑपरेशन एपिक फ्यूरी को लीड कर रही अमेरिकी सेंटकॉम फोर्स केएडमिरल ब्रैड कूपर ने B2 बॉम्बर्स के इस्तेमाल की जानकारी दी। कूपर ने बताया कि फोर्स ने पिछले 72 घंटे में ईरान के भीतर 200 टारगेट हिट किए हैं। B2 बॉम्बर्स ने 2000 पौंड (900 किलो) के पीनेट्रेटर बॉम्ब ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर्स के ठिकानों पर गिराए हैं, जिनसे भारी तबाही मची है।
Israel-US Iran War : मिडिल ईस्ट में छिड़े युद्ध से हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। 28 फरवरी को अमेरिका ने ईरान के खिलाफ ऑपरेशन एपिक फ्यूरी और इजरायल ने ऑपरेशन रोरिंग लॉयन शुरू किया। इजरायल ने ईरान के सैन्य और मिसाइल ठिकाने तबाह किए। अमेरिका ने ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनोई का मार गिराया। बदला लेते हुए ईरान ने इजरायल पर मिसाइलें दागीं। साथ ही अरब देशों में अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर हमला किया। 7 दिन से मिडिल ईस्ट में ईरान समेत करीब 10 देश युद्ध की आग में जल रहे हैं।
युद्ध के कारण 2 धड़ों में बंटी दुनिया
मिडिल ईस्ट में 7 दिन से छिड़ी जंग ने दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। क्योंकि 7 दिन में जंग के मैदान में 2 धड़े भी बन चुके हैं। एक धड़ा अमेरिका और इजरायल का है, जिसे ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी समेत कई यूरोपीय देशों का समर्थन मिल चुका है। दूसरा धड़ा ईरान का है, जिसे लेबनान, यमन, ईरान, नॉर्थ कोरिया और कई आतंकी संगठन जैसे हिजबुल्लाह, हूती आदि समर्थन दे रहे हैं। वहीं इन दोनों धड़ों के बीच तनाव में अरब देश बहरीन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब, UAE, ओमान, जॉर्डन समेत करीब 10 देश पिस रहे हैं।
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दुनिया पर इस युद्ध क्या पड़ रहा असर?
मिडिल ईस्ट में चल रही जंग के कारण होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही ठप होने से कई देशों में तेल का संकट गहरा गया है। तेल की कीमतों में उछाल आया है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। मिडिल ईस्ट के सभी देशों से अन्य देशों का संपर्क कट गया है, क्योंकि उड़ानें रद्द हो गई हैं। अरब देशों में बसे करोड़ों लोग फंस गए हैं और उनकी सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है। दुनिया में वैश्विक आर्थिक अस्थिरता पैदा हो गई। क्योंकि शेयर बाजारों में गिरावट आ गई है और निवेशक सोने की ओर भाग रहे हैं, यानी बड़ा आर्थिक नुकसान होगा।
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