दक्षिणी लेबनान में हिज़्बुल्लाह के साथ जारी भीषण जंग में इज़राइल को बड़ा नुकसान हुआ है। आईडीएफ (IDF) ने पुष्टि की है कि मुठभेड़ के दौरान उसके चार सैनिक मारे गए और दो गंभीर रूप से घायल हैं।
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट ने अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि ईरान पर हमले से ठीक पहले उनके ब्रोकर ने बड़ी रक्षा कंपनियों में मोटा निवेश करने की कोशिश की थी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वे ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान रोक सकते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि वे हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद हालत में ही छोड़कर पीछे हटने को तैयार हैं।
Report: Trump told aides he is willing to end the military campaign against Iran even if the Strait of Hormuz remains largely closed and leave a complex operation to reopen it for a later date.https://t.co/DuBM2h0Hmm
— The Jerusalem Post (@Jerusalem_Post) March 31, 2026
US-Israel Iran War LIVE Updates: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़ी इस भीषण जंग की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को हुई, जब 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत तेहरान समेत कई शहरों पर 900 से ज्यादा हवाई हमले किए गए. इस शुरुआती हमले में ही ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई और कई बड़े सैन्य अधिकारियों की मौत हो गई, जिसने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया. जवाब में ईरान ने भी इजराइल और खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी बेस पर सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागकर जोरदार पलटवार किया. मार्च का पूरा महीना आसमान से बरसते बारूद और समुद्र में बढ़ते तनाव के नाम रहा, जिसमें होर्मुज जलमार्ग बंद होने से वैश्विक तेल संकट गहरा गया और लाखों लोग विस्थापित हुए.
50 हजार सैनिकों के साथ ईरान की घेराबंदी
आज 31 मार्च 2026 तक स्थिति यह है कि जंग अब और भी घातक मोड़ ले चुकी है और अमेरिका ने अपने 50 हजार सैनिकों के साथ ईरान की जमीनी घेराबंदी पूरी कर ली है. इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि युद्ध ने अपने आधे से ज्यादा लक्ष्य हासिल कर लिए हैं, वहीं आज सुबह ही दुबई पोर्ट पर एक कुवैती तेल टैंकर पर ईरान के हमले की खबर आई है जिससे समुद्र में तेल रिसाव का खतरा बढ़ गया है. राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान जल्द ही उनकी शर्तों पर समझौता नहीं करता और होर्मुज का रास्ता नहीं खोलता, तो अमेरिका उसके बिजली और पानी जैसे नागरिक बुनियादी ढांचों को भी तबाह कर सकता है. फिलहाल दोनों तरफ से भारी नुकसान और मौतों के बावजूद शांति की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है.
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