ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक ने अमेरिका और ईरान के बीच बिगड़ती शांति वार्ता पर चर्चा की और कहा कि हालात को और बिगड़ने से रोका जाना चाहिए.
सऊदी अरब ने घोषणा की है कि उसने किंग अब्दुलअज़ीज़ एयरबेस पर 13,000 पाकिस्तानी सैनिकों और 10-18 पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों की तैनाती की है. एक पाकिस्तानी अधिकारी ने बताया कि यह कदम दोनों देशों के रक्षा समझौते का हिस्सा है, जिसमें एक पर हमला दोनों पर हमला माना जाएगा. पाकिस्तान जो अब तक मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था, अब ईरान के खिलाफ सऊदी के खुलकर साथ खड़ा हो गया है.
अमेरिका के साथ बातचीत फेल होने के बाद ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने कहा- अमेरिका ने ईरान के तर्क और सिद्धांतों को समझ लिया है और अब उसे तय करना है कि वो हमारा विश्वास जीत सकता है या नहीं?
इस्लामाबाद वार्ता फेल होने के कुछ घंटों बाद ट्रंप ने एक पोस्ट शेयर किया जिसमें पूर्ण नौसैनिक नाकाबंदी का जिक्र है. पूर्ण नौसैनिक नाकाबंदी वही रणनीति है, जिसे ट्रंप ने वेनेजुएला को कमजोर करने के लिए इस्तेमाल किया था और जिसके बाद मादुरो की सत्ता उखड़ गई थी
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmile Baghei ने हालिया वार्ताओं की विफलता पर एक इंटरव्यू में कहा कि कई मुद्दों पर सहमति बनी, लेकिन कुछ प्रमुख बिंदुओं पर मतभेद बरकरार रहा. Baghaei ने कहा कि कूटनीति जारी है क्योंकि वो कभी खत्म नहीं होती.
शांति वार्ता फेल होने पर ईरान ने कहा कि कई बिंदुओं पर अमेरिका से सहमति बनी, लेकिन दो अहम मुद्दों पर दोनों के विचार अलग-अलग थे
अमेरिका-ईरान के बीच इस्लामाबाद वार्ता फेल हो गई है और जेडी वेंस के नेतृत्व वाला अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान से वॉशिंगटन के लिए रवाना हो गया है. इसी बीच ईरान के प्रेस टीवी ने बताया कि ईरान-अमेरिका वार्ता में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और परमाणु अधिकारों समेत कई मुद्दें विवाद का प्रमुख केंद्र रहे.
अमेरिका-ईरान वार्ता फेल होने पर ईरान ने अमेरिका पर निशाना साधा है. ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका वार्ता से हटने का बहाना ढूंढ रहा हैं.
US Iran War Ceasefire Islamabad Talk: ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के बीच सीजफायर को लेकर इस्लामाबाद जो शांति वार्ता हुई, वो अब फेल हो गई है. 21 घंटे की बैठक के बाद ईरान का कहना है कि वो अमेरिका के साथ आगे कोई बात नहीं करना चाहता. ईरानी मीडिया ने तो ये भी दावा किया कि अमेरिका इस बातचीत के लिए कभी सीरियस नहीं था और वो बस यहां से भागने का बहाना ढूंढ रहा था. ईरान का कहना है कि अमेरिका इस बातचीत के जरिए सिर्फ दुनिया के सामने अपनी इमेज बेहतर करना चाहता था. ईरान ने कहा कि अमेरिका शांति वार्ता के दौरान भी शर्तें रख रहा था जिन्हें मानना बेहद मुश्किल था. ईरान का आरोप है कि अमेरिका जानबूझ के ऐसा कर रहा था ताकि वक्त आने पर बातचीत फेल होने का ठीकरा ईरान पर फोड़ा जा सके.
कौन-कौन शामिल हुए?
इस बैठक में ईरान की ओर से तेहरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर गालिबफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल हुए. वहीं, अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे.डी. वैंस, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद और विशेष सलाहकार जेरेड कुशनर, और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ मौजूद रहे.
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पाकिस्तान का क्या रोल रहा?
पाकिस्तान ने ईरान और अमेरिका के बीच सुलह करवाने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाई. दोनों पक्षों का स्वागत पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार और पाकिस्तान के मिलिट्री चीफ असीम मुनीर ने किया. पाकिस्तान अमेरिका और ईरान युद्ध को रुकवाने की कोशिश में जुटा है ताकि दोनों के बीच शांति समझौता हो सके.
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होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का रुख
अमेरिका और ईरान शांति वार्ता की अहम कड़ी रहा- होर्मुज स्ट्रेट, जिसे ईरान ने बंद कर रखा है. अमेरिका इस कोशिश में है कि इसे खोला जाए. लेकिन ईरान ने ये साफ कर दिया है कि वो इसे अपनी मर्जी से खोलेगा. दरअसल, होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के अहम तेल मार्गों में से एक है, जिसके बंद होने से ऑयल सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है.
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