अमेरिका और ईरान के बीच कई दिनों से संघर्ष देखने को मिल रहा है। इसको सुलझाने के लिए बीते दिने दोनों देशों के बीच ओमान में बैठक हुई। उम्मीद जताई जा रही थी कि इस बैठक के बाद दोनों देशों के संबंध बेहतर होंगे। लेकिन कहानी उलटी ही रही। बैठक के बाद ही अमेरिका ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगा दिए। शुक्रवार को अमेरिका ने ईरानी पेट्रोलियम, पेट्रोलियम उत्पादों और पेट्रोकेमिकल्स के अवैध व्यापार से जुड़े 15 संस्थाओं और 14 शैडो-फ्लीट जहाजों पर नए प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है।

काफी प्रयासों के बाद अमेरिका और ईरान में बैठक हुई। फिर एक ओर ओमान में बातचीत चल रही थी, वहीं दूसरी ओर अमेरिका ने ईरान के नए प्रतिबंध लगा दिए। किसी को अमेरिका के इस कदम की उम्मीद नहीं थी। हालांकि ओमान के मस्कट में हुई बातचीत को ईरान ने सकारात्मक बताया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बातचीत को अच्छी शुरुआत बताया। कहा कि दोनों देशों ने अपने विचार खुले तौर पर साझा किए हैं। वार्ता जारी रखने पर सहमति हुई है।

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अराघची ने ईरानी ने साफ किया कि आगे की बातचीत इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों देशों के नेगोशिएटर अपनी-अपनी राजधानियों में सलाह-मशविरा कर किस दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं। अराघची ने भरोसे की कमी को इस प्रोसेस की सबसे बड़ी चुनौती बताया है। अराघचील ने कहा कि बिना विश्वास के ठोस परिणाम प्राप्त करना कठिन होगा।

वहीं अमेरिका बातचीत को केवल न्यूक्लियर कार्यक्रम तक सीमित रखना नहीं चाहता है। अमेरिका ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम, क्षेत्रीय सशस्त्र समूहों को समर्थन और देश के अंदर ह्यूमन राइट्स स्थिति जैसे मुद्दों पर भी बात करना चाहता है। जबकि ईरान ऐसा नहीं चाहता है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान अमेरिका से केवल अपने परमाणु कार्यक्रम पर ही बातचीत करेगा। इसके अलावा किसी अन्य विषय पर चर्चा नहीं होगी।

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