US Iran Nuclear Talks: अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु ठिकानों की जांच (न्यूक्लियर इंस्पेक्शन) को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. दोनों देश इस बात पर आमने-सामने आ गए हैं कि तेहरान ने अपने परमाणु ठिकानों पर संयुक्त राष्ट्र (UN) की जांच को हरी झंडी दी है या नहीं. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सख्त रुख अपनाते हुए ईरान को दोटूक चेतावनी दी है. ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान जांच के लिए तैयार नहीं होता है, तो अमेरिका इस बातचीत को तुरंत बंद कर देगा. हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि जांच शुरू करने में उन्हें कोई जल्दबाजी नहीं है.

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क्या है ताजा विवाद?

विवाद की शुरुआत तब हुई जब ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने एक बयान जारी किया. उन्होंने अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस के दावों को खारिज करते हुए कहा कि पिछले साल जिन परमाणु साइटों पर बमबारी हुई थी, वहां यूएन अधिकारियों की जांच के लिए अभी कोई तारीख या समय तय नहीं हुआ है. इसके उलट अमेरिका का दावा है कि इस जांच को लेकर पहले ही सहमति बन चुकी है. यह असहमति ऐसे समय में सामने आई है जब स्विट्जरलैंड में दोनों देशों की तकनीकी टीमें बातचीत कर रही हैं और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान पाकिस्तानी मध्यस्थों से मुलाकात कर रहे हैं.

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होर्मुज स्ट्रेट से 11 हजार क्रू मेंबर्स को निकालने की तैयारी

दोनों देशों के बीच बढ़ते इस तनाव के बीच एक बड़ी खबर होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) से आ रही है. इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन ने जानकारी दी है कि होर्मुज स्ट्रेट में फंसे करीब 11 हजार जहाजों के क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बाहर निकालने का रेस्क्यू प्लान शुरू कर दिया गया है.

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दूसरी ओर, तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान पाकिस्तान के दौरे पर पहुंचे हैं, जहां उन्होंने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से मुलाकात की. पेजेशकियान ने साफ किया कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे इस समझौते में उनके देश के मिसाइल प्रोग्राम का कोई जिक्र नहीं है.

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60 दिनों का मिला है समय

गौरतलब है कि पिछले हफ्ते ही दोनों देशों के बीच एक शुरुआती डील हुई थी, जिसके तहत ईरान को अपना यूरेनियम स्टॉक कम करना था और बदले में अमेरिका उस पर लगे प्रतिबंध हटाने वाला था. इस बड़ी डील को अंतिम रूप देने के लिए दोनों पक्षों को 60 दिन का समय मिला है. स्विट्जरलैंड में चल रही वार्ता में प्रतिबंधों को हटाने, परमाणु मुद्दे और निगरानी जैसे विषयों पर अलग-अलग वर्किंग ग्रुप काम कर रहे हैं, लेकिन ट्रंप के इस सख्त रुख के बाद अब बातचीत खटाई में पड़ती नजर आ रही है.

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