मिडिल ईस्ट की जंग खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच ज्ञापन समझौता (MOU) वर्चुअली साइन हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने इस पर ऑनलाइन साइन किए। अब 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर हो सकते हैं। ट्रंप खुद जेनेवा नहीं जाएंगे, लेकिन कार्यक्रम में जेडी वेंस हिस्सा लेंगे। वहीं ईरान की तरफ से कौन आएगा? अभी फैसला होना है।

ईरान परमाणु हथियार न रखने के लिए माना

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने G-7 समिट में जाने से पहले पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ईरान ने परमाणु हथियार न रखने पर सहमति जताई है। लेकिन अमेरिका ईरान को 30 करोड़ डॉलर दे रहा है, यह खबर फर्जी है, जो डेमोक्रेट्स ने फैलाई है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर 2 चरणों में बातचीत होगी। होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक बिना टोल के खुली रहे, अमेरिका चाहता है, लेकिन अभी कई शर्तों पर सहमति बाकी है। इजरायल का विवाद जल्दी ही सुलझा लिया जाएगा, कोई टेंशन वाली बात नहीं।

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अमेरिका से डील में ईरान को क्या-क्या मिला?

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने मीडिया को बताया कि समझौते में क्या-क्या है? ईरान की क्या शर्तें हैं? अमेरिका को ईरान को क्या देना होगा? समझौते में ईरान की फ्रीज हुई संपत्तियों को वापस करना, ईरान पर लगाई गई आर्थिक पाबंदियां हटाना, तेल-गैस बिना रोक-टोक के बेचना शामिल है। होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से सेवा शुल्क वसूला जाएगा। लेबनान में जंग पूरी तरह बंद होगी। परमाणु मुद्दे पर अलग से 60 दिन के अंदर बातचीत होगी।

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लेबनान में पूर्ण युद्ध की समाप्ति मुख्य मकसद

इस्माइल ने बताया कि इजरायल का लेबनान से युद्ध खत्म करना और इजरायल की सेना का लेबनान से निकलना भी समझौते में शामिल है। यह सिर्फ युद्धविराम नहीं है, बल्कि युद्ध की पूर्ण समाप्ति है। MOU में 'लेबनान' का जिक्र 3 बार हुआ है। लेबनान की संप्रभुता का सम्मान, लेबनान की जमीनी अखंडता और जंग बंद करना शामिल है। इजरायल को इस पर आपत्ति है, यह तो ट्रंप को देखना है। हम अपनी शर्त बता चुके हैं और जब तक यह पूरी नहीं होगा, आगे बातचीत नहीं होगी।

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होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से वसूलेंगे टैक्स

इस्माइल ने बताया कि समझौते का एक और बड़ा और नया पहलू होर्मुज स्ट्रेट से सर्विस टैक्स की वसूली है। होर्मुज स्ट्रेट से हर रोज लाखों बैरल तेल की सप्लाई होती है। ऐसे में ईरान अब होर्मुज स्ट्रेट से जो जहाज गुजरेंगे, उनसे नेविगेशन, इंश्योरेंस और पर्यावरण सुरक्षा जैसी सेवाओं के बदले फीस ली जाएगी। यह टोल टैक्स नहीं है, बल्कि सेवाओं के बदले शुल्क है। ऐसे में अब होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों का गुजरना इस बात पर निर्भर करेगा कि दूसरा पक्ष यानी अमेरिका/इजरायल कैसा व्यवहार करते हैं?

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ईरान से जेनेवा कौन जाएगा और परमाणु मुद्दा?

इस्माइल ने बताया कि MOU में परमाणु मुद्दे को लेकर मेन पॉइंट यह है कि जेनेवा में समझौते पर दस्तखत के बाद 60 दिन के अंदर ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु मुद्दे और पाबंदियां हटाने पर अलग से बातचीत होगी, यानी MOU सिर्फ शुरुआत है, असली बातचीत अभी होनी है। 19 जून को समझौते पर हस्ताक्षर से पहले ईरान के अधिकारी पड़ोसी और क्षेत्रीय देशों का दौरा करेंगे। कौन साइन करेगा, यह एक-दो दिन में तय हो जाएगा और आधिकारिक तौर पर इसका ऐलान किया जाएगा।

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नेतन्याहू का लेबनान को नहीं छोड़ने का ऐलान

इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा है कि यह समझौता अमेरिका और ईरान का है। इजरायल इस समझौते की वजह से लेबनान से नहीं हटेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ जो समझौता किया है , उसके जरिए वे ईरानी परमाणु कार्यक्रम की निगरानी कर उसे खत्म भी कर सकते हैं, ऐसा इजरायल मानता है। लेकिन यह उनका फैसला है, जबकि इजरायल के अपने हित हैं। इजरायल ने लेबनान में सिक्योरिटी जोन बनाया है और इजरायल लेबनान में तब तक रहेगा, जब तक उसकी सुरक्षा के लिए आवश्यक होगा। अमेरिका इजरायल की इस दृढ़ता और संकल्प का सम्मान करेगा, इसकी उम्मीद है।