अमेरिका और इजरायल ने ज्वॉइंट ऑपरेशन के तहत शनिवार को ईरान पर अचानक हमला बोल दिया. सबसे पहले ईरान की राजधानी तेहरान को निशाना बनाया गया. सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के घर के आसपास अचानक हुए धमाकों ने पूरे ईरान को दहला कर रख दिया. एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि ये अभियान लंबे समय तक जारी रह सकता है. वहीं इजरायल के रक्षा अधिकारी का कहना है कि इस हमले की प्लानिंग कई महीने पहले से की जा रही थी.
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राष्ट्रपति ट्रंप ने जारी किया बयान
मिडिल ईस्ट में चल रहा तनाव अब युद्ध में बदलता दिख रहा है. 28 फरवरी 2026 को अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर बड़ा सैन्य हमला किया है. इस हमले में ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई इलाकों में जोरदार धमाकों की खबर सामने आई है. इस कार्रवाई के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में हालात बेहद गंभीर हो गए हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि ये कार्रवाई ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल ताकत को खत्म करने के लिए की गई है. ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका अब किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार बनाने की इजाजत नहीं देगा.
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इजरायल ने क्यों दिया साथ?
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी इस सैन्य अभियान का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि ईरान लंबे समय से इजरायल की सुरक्षा के लिए खतरा बना हुआ है. नेतन्याहू के मुताबिक, अगर ईरान को समय रहते नहीं रोका गया, तो पूरे क्षेत्र में तबाही मच सकती है. हमले के बाद तेहरान में कई जगह विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं. ईरानी मीडिया के मुताबिक, कुछ सैन्य ठिकानों और रणनीतिक इलाकों को निशाना बनाया गया है. हालांकि, अब तक जान-माल के नुकसान को लेकर कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है.
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ईरान की चेतावनी
ईरान ने इस हमले को अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला बताया है. ईरानी के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा है कि ये हमला पूरी तरह गैरकानूनी और नाजायज है. फिलहाल ईरान की सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है और मिसाइल डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए हैं. पिछले कुछ महीनों से ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा था. परमाणु समझौते को लेकर बातचीत विफल होने के बाद हालात और बिगड़ गए. वहीं, इजरायल लगातार ईरान पर आरोप लगाता रहा है कि वो गुप्त रूप से परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ये युद्ध लंबा चला, तो इसका असर तेल की कीमतों, वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ेगा.