ईरान पर 'मदर ऑफ ऑल बॉम्ब' गिराने की प्लानिंग में US! जानिए - कितना खतरनाक है 10 टन वजनी ये 'महाबम'

अमेरिकी सेना ने इसका पहला और एकमात्र युद्धक इस्तेमाल 2017 में ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट के भूमिगत गुफाओं और सुरंगों के नेटवर्क को नष्ट करने के लिए किया था.

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इस महाबम को ईरान के खिलाफ इस्तेमाल करने का कोई अंतिम फैसला अभी नहीं लिया गया है. (Image - ANI)

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच एक सनसनीखेज रिपोर्ट सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन ईरान के एनर्जी इंफ्रा और दूसरे अहम ठिकानों पर अपने सबसे पावरफुल गैर-परमाणु हथियार ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब’ का इस्तेमाल करने के विकल्प पर विचार कर रहा है. CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, इस महाबम को ईरान के खिलाफ इस्तेमाल करने का कोई अंतिम फैसला अभी नहीं लिया गया है.

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क्या है ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब’?

जीबीयू-43/बी अमेरिकी सेना का सबसे बड़ा गैर-परमाणु बम है. इसका वजन 21,600 पाउंड है. यह बंकर-बस्टर बमों की तरह जमीन के गहरे भीतर जाकर नहीं फटता, बल्कि जमीन से ठीक पहले हवा में ही फट जाता है. हवा में फटने की वजह से इसका शॉकवेव और दबाव तरंगें चारों तरफ तेजी से फैलती हैं, जो लगभग 9 शहरी ब्लॉकों के बराबर क्षेत्र को पूरी तरह समतल करने की क्षमता रखती हैं.

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इस बम को इराक युद्ध के दौरान दुश्मन सेना के मनोबल को मनोवैज्ञानिक रूप से तोड़ने के लिए डिजाइन किया गया था. अमेरिकी सेना ने इसका पहला और एकमात्र युद्धक इस्तेमाल 2017 में ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट के भूमिगत गुफाओं और सुरंगों के नेटवर्क को नष्ट करने के लिए किया था.

क्या ईरान के भूमिगत बंकरों पर असरदार होगा?

ईरान के प्रमुख परमाणु ठिकाने सैकड़ों फीट नीचे ग्रेनाइट की मजबूत चट्टानों के भीतर बनाए गए हैं. MOAB गहराई तक छेदने वाला हथियार नहीं है, इसलिए यह सतह पर तबाही मचा सकता है लेकिन पहाड़ों के भीतर मौजूद गहरी फैसिलिटीज का खात्मा करने में नाकाम रह सकता है. अगर इसका इस्तेमाल रिहायशी इलाकों के नजदीक मौजूद रिफाइनरियों या ऊर्जा संयंत्रों पर किया जाता है, तो बड़े पैमाने पर आम नागरिकों के मारे जाने का खतरा है.

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मनोवैज्ञानिक दबाव की रणनीति

रिपोर्ट के मुताबिक, इस हथियार को योजना में शामिल करने का मुख्य मकसद ईरान पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना है. डोनाल्ड ट्रंप इस युद्ध को खत्म करने के लिए कोई निर्णायक परिणाम हासिल करना चाहते हैं, जिसे वे आगामी नवंबर के मिडटर्म इलेक्शन से पहले अपनी राजनीतिक जीत के रूप में पेश कर सकें.

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लेखक के बारे में

Arif Khan

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आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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