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ईरान पर अमेरिकी हमले से भारत-चीन को झटका क्यों? शाहिद टर्मिनल तबाह, रेल ब्रिज भी टूटा

US Strike Iran Chabahar Port: अमेरिका ने ईरान के रणनीतिक चाबहार बंदरगाह पर मिसाइल हमला कर शाहिद बेहेश्ती पोर्ट टर्मिनल को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिसमें भारत का अरबों रुपये का निवेश लगा है. इसके साथ ही उत्तरी ईरान में चीन-रूस को जोड़ने वाला प्रमुख रेलवे पुल भी निशाना बना है. इस हमले के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया है और भारत-चीन की कनेक्टिविटी योजनाओं पर अनिश्चितता का संकट मंडराने लगा है.

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US Strike Iran Chabahar Port : मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए नए सैन्य हमलों ने भारत और चीन जैसे प्रमुख एशियाई देशों की चिंता बढ़ा दी है. अमेरिकी मिसाइल हमलों ने ईरान के रणनीतिक दक्षिण-पूर्वी बंदरगाह शहर चाबहार के ‘शाहिद बेहेश्ती पोर्ट टर्मिनल’ को भारी नुकसान पहुंचाया है. इसके अलावा, उत्तरी ईरान में चीन और रूस को जोड़ने वाले एक अहम रेलवे पुल को भी निशाना बनाया गया है.

भारत के अरबों के निवेश पर संकट

चाबहार स्थित शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल का संचालन भारत 10 साल के रणनीतिक समझौते के तहत कर रहा है. यह बंदरगाह भारत को पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफगानिस्तान, मध्य एशिया और यूरोप तक सीधी पहुंच प्रदान करता है. यह ‘इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर’ (INSTC) का बेहद अहम हिस्सा है.

ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी हमलों में चाबहार का वेसल ट्रैफिक कंट्रोल टावर, कलंतरी पोर्ट और बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर प्रभावित हुआ है, जिससे शहर के लगभग आधे हिस्से में बिजली गुल हो गई. शाहिद बेहेश्ती डॉक पर कई प्रोजेक्टाइल गिरने से बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुंचा है. भारत ने इस प्रोजेक्ट को विकसित करने के लिए अब तक करीब 120 मिलियन डॉलर का निवेश किया है और यह बंदरगाह भारत की क्षेत्रीय व्यापार नीति की रीढ़ माना जाता है.

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चीन और रूस का रेल कॉरिडोर भी टूटा

अमेरिकी स्ट्राइक की चपेट में केवल भारत का निवेश ही नहीं आया, बल्कि चीन का व्यापारिक मार्ग भी प्रभावित हुआ है. पूर्वोत्तर गोलेस्तान प्रांत में स्थित अक तघे खान रेलवे पुल पर क्रूज मिसाइल से हमला किया गया. यह रणनीतिक पुल तेहरान को चीन, तुर्कमेनिस्तान और कजाकिस्तान से जोड़ता है और चीन के साथ व्यापार का प्रमुख जरिया है.
ईरान पर बंदरगाह नाकेबंदी के दौरान रूस को सामान भेजने के लिए भी इसी रास्ते का इस्तेमाल किया जाता था. इसके अलावा तेहरान और मशहद के बीच यात्री रेल सेवाएं भी रोक दी गई हैं. इन हमलों से साफ है कि अमेरिका-ईरान संघर्ष का सीधा असर एशियाई अर्थव्यवस्थाओं और व्यापारिक गलियारों पर पड़ने लगा है.

सीजफायर का अंत और डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा रुख

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा मध्य पूर्व में अप्रैल 2026 में हुए सीजफायर को समाप्त घोषित करने के बाद यह कार्रवाई की गई है. अमेरिका का दावा है कि ईरान होर्मुज की खाड़ी में व्यापारिक जहाजों पर हमले करवा रहा था. जवाब में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइलें दागी हैं, जिससे पूरा मिडिल ईस्ट युद्ध के मुहाने पर खड़ा हो गया है.

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