अमेरिकी राजदूत एवं दक्षिण-मध्य एशिया मामलों के विशेष दूत सर्जियो गोर 19 अगस्त से जम्मू-कश्मीर की दो दिवसीय यात्रा पर रहेंगे. अपने दौरे के दौरान वह श्रीनगर में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से अलग-अलग मुलाकात करेंगे. अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद किसी अमेरिकी राजदूत का यह जम्मू-कश्मीर का पहला आधिकारिक दौरा है.

सर्जियो गोर के पद संभालने के बाद जम्मू-कश्मीर का यह पहला दौरा है. खास बात यह है कि अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 और 35ए के प्रावधानों में बदलाव और जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद किसी कार्यरत अमेरिकी राजदूत की यह पहली आधिकारिक कश्मीर यात्रा है. इससे पहले जनवरी 2020 में तत्कालीन अमेरिकी राजदूत केनेथ जस्टर एक बहुपक्षीय राजनयिक प्रतिनिधिमंडल के साथ घाटी पहुंचे थे.

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गोर की इस यात्रा को केवल एक सामान्य कूटनीतिक दौरे के रूप में नहीं देखा जा रहा है. उनका श्रीनगर दौरा ऐसे समय पर हो रहा है, जब घाटी में आतंकवाद की स्थिति में बड़ा बदलाव आया है और सुरक्षा के मोर्चे पर हालात पहले की तुलना में काफी बेहतर हुए हैं. दूसरी ओर, पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में भी स्थानीय स्तर पर असंतोष और विरोध के स्वर लगातार सामने आ रहे हैं.

ऐसे में अमेरिकी राजदूत का कश्मीर दौरा कई महत्वपूर्ण संदेश देता है. यह यात्रा न सिर्फ जम्मू-कश्मीर की मौजूदा राजनीतिक और सुरक्षा स्थिति को समझने के लिहाज से अहम है, बल्कि भारत-अमेरिका संबंधों और दक्षिण एशिया की बदलती रणनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में भी इसके कई मायने निकाले जा रहे हैं.

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इस दौरे से ज्यादा अहम है अमेरिका का कश्मीर को लेकर बदलता नजरिया

सर्जियो गोर की श्रीनगर यात्रा को केवल एक राजनयिक कार्यक्रम मानकर देखना तस्वीर का एक हिस्सा ही होगा. असल सवाल यह है कि मौजूदा दौर में अमेरिकी नीति-निर्माता जम्मू-कश्मीर को किस व्यापक दृष्टिकोण से देखते हैं. क्या वाशिंगटन अब भी कश्मीर को मुख्य रूप से भारत-पाकिस्तान के बीच विवाद और दक्षिण एशिया में तनाव के संदर्भ में रखता है, या फिर भारत के साथ लगातार मजबूत होते रणनीतिक रिश्तों के बीच इस मुद्दे को नए नजरिए से देख रहा है?

श्रीनगर दौरे को क्यों माना जा रहा अहम?

अमेरिकी राजदूत के कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर के शीर्ष संवैधानिक और निर्वाचित नेतृत्व के साथ बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. 2024 में विधानसभा चुनाव के बाद केंद्र शासित प्रदेश में निर्वाचित सरकार बनने के बाद गोर की मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात भी एक खास राजनीतिक महत्व रखती है. जम्मू-कश्मीर में इस समय राज्य का दर्जा बहाल करने और संवैधानिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं.

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गोर का दौरा केवल राजनीतिक संपर्क तक सीमित रहेगा या वह कारोबार, नागरिक समाज, राजनीतिक दलों अथवा सुरक्षा से जुड़े प्रतिनिधियों से भी बातचीत करेंगे, इसकी आधिकारिक जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है. ऐसे में उनकी यात्रा के दौरान होने वाली बैठकों और उसके बाद अमेरिकी पक्ष की ओर से जारी होने वाले बयान पर नजर रहेगी.

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लद्दाख भी जाएंगे गोर

इस दौरे का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू लद्दाख है. श्रीनगर में रुकने के बाद गोर के गुरुवार को लद्दाख जाने की योजना है. मिली जानकारी के अनुसार, जून 2020 की गलवान घाटी झड़प के बाद किसी अमेरिकी राजदूत का यह लद्दाख का पहला दौरा होगा. कश्मीर और लद्दाख को एक ही यात्रा में शामिल करना दक्षिण एशिया की सुरक्षा और भारत-अमेरिका रणनीतिक संबंधों के व्यापक संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. गोर की जिम्मेदारी भारत तक सीमित नहीं है. दक्षिण और मध्य एशिया के लिए विशेष दूत के रूप में वह व्यापक क्षेत्रीय मामलों से भी जुड़े हैं. ऐसे में उनका जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दौरा स्थानीय राजनीतिक घटनाक्रम के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षा, भारत-अमेरिका सहयोग और बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों को समझने के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है.

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