ईरान के साथ सीजफायर होते ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने अगले मिशन का संकेत दे दिया है. ट्रंप ने साफ तौर पर कहा है कि अब क्यूबा की बारी है और वे इस कैरिबियन द्वीप पर बड़ा बदलाव लाना चाहते हैं. फ्लोरिडा से मात्र 170 किलोमीटर दूर स्थित क्यूबा को लेकर अमेरिका की जिद बहुत पुरानी है. पिछले 67 सालों में अमेरिका के 13 राष्ट्रपतियों ने यहां अपना प्रभाव जमाने की कोशिश की लेकिन फिदेल कास्त्रो की क्रांति के बाद से अमेरिका को यहां कभी कामयाबी नहीं मिली. अब ट्रंप वेनेजुएला पर नियंत्रण के बाद क्यूबा को अपने पाले में लाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं.
अंधेरे में क्यूबा और तेल का खेल
फिलहाल क्यूबा इतिहास के सबसे बड़े बिजली संकट से जूझ रहा है और पूरा देश ब्लैकआउट की चपेट में है. यहां न तेल है और न ही गैस जिससे अस्पताल से लेकर स्कूल और फैक्ट्रियां तक पूरी तरह बंद पड़ी हैं. दरअसल क्यूबा अपनी बिजली के लिए वेनेजुएला के तेल पर निर्भर था लेकिन जनवरी 2026 में वहां अमेरिकी दखल के बाद सप्लाई काट दी गई. अमेरिका ने दुनिया भर के देशों को चेतावनी दी है कि जो भी क्यूबा को तेल बेचेगा उसे भारी व्यापारिक पाबंदियां झेलनी होंगी. रूस ने थोड़ी बहुत मदद जरूर भेजी है लेकिन वह इस गहरे संकट को दूर करने के लिए काफी नहीं है.
---विज्ञापन---
यह भी पढ़ें: सुप्रीम लीडर की मौत, 90000 घर तबाह, 4000 मौतें… 40 दिन की जंग में अमेरिका-ईरान ने क्या क्या झेला, देखें टाइमलाइन
---विज्ञापन---
कास्त्रो की क्रांति और सीआईए की साजिश
क्यूबा और अमेरिका की दुश्मनी साल 1959 में तब शुरू हुई जब फिदेल कास्त्रो ने क्रांति के जरिए अमेरिकी इशारों पर चलने वाली सरकार को उखाड़ फेंका था. कास्त्रो ने क्यूबा में मौजूद सभी अमेरिकी कंपनियों को बाहर निकाल दिया और जमीनों का राष्ट्रीयकरण कर दिया जिससे अमेरिका बुरी तरह भड़क गया. इसके बाद सीआईए ने कास्त्रो को मारने की रिकॉर्ड 638 बार कोशिश की जिसमें जहर वाले सिगार से लेकर ब्लास्ट होने वाले माइक तक का इस्तेमाल किया गया. साल 1962 में तो क्यूबा मिसाइल संकट की वजह से दुनिया परमाणु युद्ध के कगार पर पहुंच गई थी लेकिन कास्त्रो कभी अमेरिका के आगे नहीं झुके.
क्या होगा क्यूबा का भविष्य?
ट्रंप की रणनीति अब क्यूबा पर आर्थिक दबाव बढ़ाकर वहां की सरकार को घुटनों पर लाने की है ताकि वह अमेरिका की शर्तों को मान ले. क्यूबा में मौजूदा बिजली और खाने का संकट इसी दबाव का नतीजा माना जा रहा है ताकि आम जनता परेशान होकर बदलाव की मांग करे. अमेरिका इसे 'फ्रेंडली टेकओवर' का नाम दे रहा है लेकिन क्यूबा का इतिहास बताता है कि यह इतना आसान नहीं होगा. पूरी दुनिया का ध्यान फिलहाल मध्य पूर्व की जंग पर है जिसका फायदा उठाकर अमेरिका अपने पड़ोस में स्थित इस छोटे से देश की सत्ता पलटने की बड़ी तैयारी में जुटा हुआ है.