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ऑपरेशन सिंदूर से लेकर ईरान युद्ध तक, पाकिस्तान ने कैसे चुकाया अमेरिका का एहसान?

जियोपॉलिटिक्स का बड़ा खेल, पिछले साल ट्रंप ने भारत के हमले से पाकिस्तान को बचाया तो अब पाकिस्तान ने ईरान की जंग में सीजफायर के लिए मध्यस्थता कर ट्रंप की साख बचाई. ‘क्या पाकिस्तान ने ट्रंप का ‘एहसान’ चुका दिया? पढ़िए इस सीक्रेट डील की पूरी इनसाइड स्टोरी

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जियोपॉलिटिक्स में कुछ भी मुफ्त नहीं होता और पाकिस्तान ने इसे बखूबी साबित कर दिया है. पाकिस्तान आर्मी चीफ असिम मुनीर को यह बात पिछले साल डोनाल्ड ट्रंप के साथ क्लोज्ड-डोर लंच के बाद अच्छे से समझ आ गई होगी. उस वक्त भारत के ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के एयर बेस तबाह हो रहे थे और उसे अमेरिका की मदद चाहिए थी. एक साल बाद रोल रिवर्स हो गया. ईरान के साथ यूएस की जंग में ट्रंप को एग्जिट चाहिए था तो पाकिस्तान ने ‘एग्जिट गेट’ बनकर वह एहसान चुका दिया. यह क्लासिक ‘आप मेरी पीठ खुजाओ, मैं तुम्हारी खुजाऊंगा’ वाला मामला है.

2025 में पाकिस्तान ने ट्रंप से मांगी थी मदद

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, पहलेगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत ने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया. भारतीय सेना के हमलों ने पाकिस्तान के टेरर कैंप्स और मिलिट्री बेस को तहस-नहस कर दिया था. बर्बादी की कगार पर खड़े पाकिस्तान ने अमेरिका से संपर्क साधा. ट्रंप प्रशासन दोनों पक्षों से संपर्क में था. आखिरकार सीजफायर हुआ, लेकिन पाकिस्तान ने भारत से सीधे संपर्क भी किया. ट्रंप ने खुद को पीस मेकर बताकर क्रेडिट लेने की कोशिश की. पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ असिम मुनीर ने ट्रंप की तारीफों के पुल बांधे. उन्होंने ट्रंप को नोबेल पीस प्राइज के लिए नामित करने का प्रस्ताव रखा.

अमेरिकी दस्तावेजों में खुलासा हुआ कि पाकिस्तान ने सीजफायर के लिए ट्रंप टीम से 50 बार से ज्यादा संपर्क किया—कॉल, ईमेल और मीटिंग्स के जरिए. इसके बाद पाकिस्तान ने ट्रंप को खुश करने के लिए हर मंच पर तारीफों की बौछार की. नतीजा? पाकिस्तान अपना ‘पैरिया’ स्टेटस निकालने में सफल रहा. क्रिप्टोकरेंसी और मिनरल डील्स मिलीं. उसे ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में जगह भी मिली.

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2026: अब ट्रंप को पाकिस्तान की जरूरत पड़ी

अप्रैल 2026 में ईरान के साथ यूएस युद्ध दूसरे महीने में पहुंच गया. ट्रंप को लगा था कि ईरान तीन हफ्तों में ढेर हो जाएगा, लेकिन ईरान ने मिडिल ईस्ट में यूएस बेस पर जोरदार हमले किए. युद्ध का खर्च बढ़ रहा था, घरेलू स्तर पर इम्पीचमेंट की मांगें उठ रही थीं. ट्रंप को एग्जिट रैंप चाहिए था. पाकिस्तान ने मदद की, क्योंकि उसके ईरान से अच्छे संबंध हैं और दोनों देश 1000 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं. ट्रंप ने पाकिस्तान को सीजफायर ब्रोकर करने के लिए कहा. पाकिस्तान ने बैकचैनल्स के जरिए काम किया. आर्मी चीफ मुनीर और ISI चीफ असिम मलिक ने फोन पर बातचीत की. पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार चीन भी गए और चीन ने आखिरी समय में तेहरान को मनाया. ट्रंप ने खुद चीन की भूमिका स्वीकार की.

सीजफायर की क्या है डिटेल?

8 अप्रैल 2026 को दो हफ्ते का सीजफायर हुआ. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर से खोलने का वादा किया. पाकिस्तान में 10 अप्रैल को दोनों पक्षों की डायरेक्ट बातचीत होने वाली है. पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई, हालांकि व्हाइट हाउस ने कुछ दावों को खारिज भी किया.

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दोनों तरफ फेवर चुकाए गए

2025 में पाकिस्तान को भारत के हमलों से फेस-सेविंग एग्जिट चाहिए था—ट्रंप ने मदद की. 2026 में ट्रंप को ईरान युद्ध से निकलने का रास्ता चाहिए था—पाकिस्तान ने दिया. दोनों तरफ फेवर चुकाए गए. ट्रंप-मुनीर दोस्ती अब नई ऊंचाइयों पर है. पाकिस्तान ने अपनी डिप्लोमेसी को बड़ा बूस्ट दिया, जबकि ट्रंप को घरेलू दबाव से राहत मिली.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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