अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ जारी जंग को लेकर बेहद सनसनीखेज दावा किया है. मियामी जाते समय एयरफोर्स वन विमान में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान के पूरे ‘दुष्ट साम्राज्य’ को तहस-नहस कर दिया है. ट्रंप ने ईरान के नेतृत्व को दुनिया के चेहरे से एक बड़े ‘कैंसर’ की तरह हटाने की बात कही. जब उनसे ईरान में एक लड़कियों के स्कूल पर हुई बमबारी के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने साफ इनकार करते हुए इसका दोष ईरान पर ही मढ़ दिया. ट्रंप का तर्क था कि ईरानी हथियार और गोला-बारूद बिल्कुल भी सटीक नही हैं और अपनी इसी चूक की वजह से उन्होंने खुद अपने स्कूल पर बम गिरा दिया होगा. राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि हम यह युद्ध बहुत बड़े अंतर से जीत रहे हैं.
ईरानी सेना और संसाधनों की तबाही का आंकड़ा
जंग के एक हफ्ते पूरे होने पर ट्रंप ने अमेरिकी उपलब्धियों का ब्यौरा देते हुए कहा कि हमने ईरान की पूरी नौसेना के 44 जहाजों को डुबो दिया है. उन्होंने दावा किया कि ईरान की वायु सेना का हर विमान और उनके ज्यादातर मिसाइलों को नष्ट कर दिया गया है. ट्रंप के अनुसार अब ईरान की तरफ से मिसाइलें आना लगभग बंद हो गई हैं क्योंकि उनके मैन्युफैक्चरिंग प्लांट और ड्रोन बनाने की क्षमता को भारी चोट पहुंचाई गई है. उन्होंने बताया कि पहले दो दिनों के मुकाबले अब ईरान केवल 9 प्रतिशत हथियार ही भेज पा रहा है. इसके अलावा अमेरिका ने ईरान के 70 प्रतिशत रॉकेट लॉन्चर्स को भी खत्म कर दिया है जो कि बहुत महंगे और मुश्किल से मिलने वाले उपकरण होते हैं.
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डिप्लोमेसी और बातचीत की गुंजाइश
युद्ध के बीच क्या ईरान के साथ किसी समझौते की उम्मीद बची है, इस पर अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने महत्वपूर्ण जानकारी दी. विटकॉफ ने कहा कि समझौता संभव है लेकिन यह पूरी तरह राष्ट्रपति ट्रंप के फैसले पर निर्भर करेगा. उन्होंने बताया कि पिछली वार्ताओं में ईरानी पक्ष का रवैया बहुत खराब था. ईरान ने अपनी परमाणु क्षमता का घमंड दिखाते हुए कहा था कि उनके पास 11 बम बनाने लायक 60 प्रतिशत संवर्धित ईंधन मौजूद है. ईरानियों ने तब दोटूक कहा था कि जो आप सैन्य रूप से नही ले सके, उसे हम कूटनीतिक रूप से नही देंगे. विटकॉफ के मुताबिक अब ईरान को अपना नजरिया बदलने की जरूरत है क्योंकि उनकी सैन्य शक्ति अब लगभग खत्म होने के कगार पर है.
वैश्विक चिंता और अर्थव्यवस्था पर असर
ईरान में जारी इस भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. ब्रिटिश सांसद टॉम टुगेंडहाट ने कहा कि यह केवल ईरान का मामला नही है बल्कि इसका असर सऊदी अरब, यूएई, बहरीन और कतर जैसे देशों पर भी पड़ रहा है. उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में भारत के करीब 90 लाख और ब्रिटेन के 3 लाख नागरिक रहते हैं जिनकी सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती है. साथ ही ऊर्जा की कीमतों और तेल की सप्लाई चैन पर पड़ने वाला असर वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला सकता है. बता दें कि यह पूरा विवाद 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के उस हमले के बाद शुरू हुआ था जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी. अब यह संघर्ष पश्चिम एशिया में एक बड़े मानवीय और आर्थिक संकट का रूप ले चुका है.
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