'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को लेकर अमेरिका और ईरान फिर आमने-सामने हैं. ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर बड़ा फैसला लिया है. तेहरान ने घोषणा की है कि अब इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से केवल चीनी जहाजों को ही गुजरने की अनुमति मिलेगी. उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए ऐलान किया कि किसी भी स्थिति में होर्मुज स्ट्रेट से तेल और ईंधन की आवाजाही को बाधित नहीं होने दिया जाएगा. United States Navy अब जरूरत पड़ने पर तेल टैंकरों को होर्मुज स्ट्रेट में एस्कॉर्ट करेगी, जितनी जल्दी हो सके. अमेरिकी सरकार कंपनियों को बहुत कम कीमत पर इंश्योरेंस उपलब्ध कराएगी, ताकि ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित रहे.
ट्रंप ने Truth Social पर पोस्ट में कहा कि DFC तुरंत प्रभाव से सभी मारिटाइम ट्रेड, खासकर एनर्जी से जुड़े जहाजों के लिए यह सुविधा देगी. उनका मकसद वैश्विक ऊर्जा संकट को रोकना और तेल कीमतों को नियंत्रित करना है.
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ट्रंप सरकार के तीन सबसे बड़े कदम
अब अमेरिका की 'यूनाइटेड स्टेट्स नेवी' स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में वाणिज्यिक तेल टैंकरों को एस्कॉर्ट करेगी. यानी अब टैंकरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी अमेरिकी युद्धपोतों की होगी.
युद्ध के खतरों के कारण बीमा कंपनियां टैंकरों से भारी प्रीमियम वसूल रही थीं. अब अमेरिकी सरकार खुद कम कीमत पर तेल टैंकरों को इंश्योरेंस उपलब्ध कराएगी, ताकि तेल की कीमतें न बढ़ें.
व्हाइट हाउस ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी स्थिति में होर्मुज की खाड़ी से ईंधन की आवाजाही को बाधित नहीं होने दिया जाएगा.
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क्या है ट्रंप का 'मिशन होर्मुज'?
ईरान ने हाल ही में संकेत दिए थे कि वह युद्ध की स्थिति में होर्मुज की खाड़ी से होने वाली तेल सप्लाई को रोक सकता है. चूंकि दुनिया का लगभग 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए ट्रंप प्रशासन ने इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर हमला माना है. रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान एक तरफ दुनिया के लिए रास्ता रोकने की धमकी दे रहा है, वहीं दूसरी ओर चीन के प्रति नरमी दिखा रहा है. ट्रंप का यह कड़ा फैसला न केवल ईरान को संदेश है, बल्कि उन देशों के लिए भी चेतावनी है जो इस संकट का फायदा उठाना चाहते हैं.