संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को देखते हुए एक बड़ा कदम उठाया है. उन्होंने अनुभवी फ्रांसीसी राजनयिक जीन आर्नो को अपना विशेष दूत नियुक्त किया है ताकि बिगड़ते हालात को बातचीत के जरिए संभाला जा सके. गुटेरेस ने चेतावनी दी है कि यह संघर्ष अब नियंत्रण से बाहर होता जा रहा है और पूरी दुनिया एक बड़े युद्ध के मुहाने पर खड़ी है. न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में उन्होंने जोर देकर कहा कि शांति के लिए की जा रही कोशिशों का सफल होना अब बहुत जरूरी हो गया है वरना इसके परिणाम बेहद घातक होंगे.

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता संकट

यूएन चीफ ने युद्ध के मानवीय पहलुओं के साथ-साथ इसके आर्थिक असर पर भी गंभीर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य का लंबे समय तक बंद रहना पूरी दुनिया के लिए मुसीबत बन सकता है क्योंकि इससे तेल, गैस और उर्वरक की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है. गुटेरेस ने अमेरिका और इजरायल से तुरंत युद्ध खत्म करने की अपील की है ताकि आम नागरिकों की जान बचाई जा सके. साथ ही उन्होंने ईरान और हिजबुल्लाह से भी पड़ोसी देशों पर हमले रोकने और लेबनान में सैन्य कार्रवाई बंद करने को कहा है ताकि क्षेत्र में स्थिरता लौट सके.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें: ईरान ने जंग रोकने के लिए रखीं 5 बड़ी शर्तें, होर्मुज स्ट्रेट पर मांगी आधिकारिक मान्यता

---विज्ञापन---

ईरान की सख्त शर्तें और ट्रंप का दावा

मिडिल ईस्ट में जारी इस जंग को जल्द ही एक महीना पूरा होने वाला है और शांति की राह अब भी मुश्किल नजर आ रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान युद्ध खत्म करना चाहता है, लेकिन तेहरान ने साफ कर दिया है कि वह अपनी शर्तों के बिना पीछे नहीं हटेगा. ईरान ने ट्रंप द्वारा दी गई किसी भी समयसीमा को मानने से इनकार कर दिया है और अमेरिकी प्रस्ताव को एकतरफा बताया है. ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार युद्धविराम का फैसला पूरी तरह से उनके अपने हाथ में है और वे किसी दबाव में आकर कोई समझौता नहीं करेंगे.

तेहरान की पांच प्रमुख मांगे

ईरान ने संघर्ष विराम के लिए पांच मुख्य शर्तें दुनिया के सामने रखी हैं जिन्हें माने बिना वह पीछे हटने को तैयार नहीं है. इन शर्तों में हमलों को पूरी तरह बंद करना, भविष्य में युद्ध रोकने का पक्का इंतजाम और हुए नुकसान की भरपाई की गारंटी शामिल है. इसके अलावा ईरान चाहता है कि सभी मोर्चों पर लड़ाई खत्म हो और हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर उसकी संप्रभुता को अंतरराष्ट्रीय मान्यता दी जाए. ईरान का कहना है कि जब तक उसकी ये जायज मांगे नहीं मानी जातीं तब तक उसकी जवाबी कार्रवाई जारी रहेगी और वह पूरे क्षेत्र में अपने हितों की रक्षा करता रहेगा.