मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब अपने सबसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. एक तरफ इजरायली मिसाइलें ईरान के शहरों को दहला रही हैं, वहीं दूसरी तरफ तेहरान के एंगलब स्क्वायर पर हजारों की भीड़ अपने नए नेता के प्रति वफादारी की शपथ ले रही है. अयातुल्ला अली खमेनई की मौत के बाद उनके 56 वर्षीय बेटे मुजतबा खमेनई को ईरान का नया सर्वोच्च नेता यानी सुप्रीम लीडर नियुक्त किया गया है. मुजतबा खमेनई को उनके पिता से भी ज्यादा सख्त स्वभाव का माना जाता है. रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के साथ उनके गहरे संबंध हैं और पर्दे के पीछे से वह लंबे समय से ईरान की राजनीति को प्रभावित करते रहे हैं. उनकी नियुक्ति को इस बात का संकेत माना जा रहा है कि ईरान इस जंग में पीछे हटने वाला नही है.

इजरायल की भीषण एयर स्ट्राइक

इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने आधिकारिक तौर पर तेहरान, इस्फहान और दक्षिणी ईरान में 'वाइड-स्केल' हवाई हमलों का ऐलान कर दिया है. इजरायल का दावा है कि उसने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांड सेंटरों, मिसाइल लॉन्चिंग साइट्स और रॉकेट इंजन बनाने वाली फैक्ट्रियों को निशाना बनाया है. अमरीका और इजरायल की ओर से पिछले एक हफ्ते से की जा रही भारी बमबारी ने ईरान के कई बुनियादी ढांचों को तबाह कर दिया है. इन हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगी हैं और ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है.

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परमाणु हथियारों का बढ़ता खतरा

मुजतबा खमेनई के हाथों में सत्ता आने के साथ ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर दुनिया भर में डर बढ़ गया है. मुजतबा अब ईरान की सेना और परमाणु फैसलों पर पूरी तरह नियंत्रण रखेंगे. विशेषज्ञों का मानना है कि वह परमाणु बम बनाने की दिशा में तकनीकी कदम उठा सकते हैं, जो उनके पिता ने अब तक नही किया था. हालांकि जून में हुई जंग के दौरान ईरान के मुख्य परमाणु ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा था, लेकिन ईरान के पास अभी भी समृद्ध यूरेनियम का भंडार है. इजरायल ने मुजतबा को अपना निशाना बनाने की धमकी दी है, वहीं अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें पूरी तरह 'अस्वीकार्य' नेता करार दिया है.