अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक हालिया बयान ने दुनिया भर के बाजारों को बड़ी राहत दी है. ट्रंप ने फ्लोरिडा में पत्रकारों से बात करते हुए दावा किया कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध जल्द ही समाप्त हो सकता है. इस भविष्यवाणी के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है. सोमवार को जो तेल तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था, वह मंगलवार को ब्रेंट क्रूड में 7.2 प्रतिशत की कमी के साथ 91.81 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. वहीं डब्लूटीआई क्रूड की दरों में भी बड़ी गिरावट देखी गई और यह 88.51 डॉलर के करीब बंद हुआ.
ट्रंप और पुतिन की सी़धी बात
बाजार में आई इस नरमी के पीछे ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई एक घंटे की फोन कॉल को मुख्य वजह माना जा रहा है. क्रेमलिन ने इस चर्चा को रचनात्मक बताया है जिसमें पुतिन ने आगाह किया कि युद्ध बढ़ने पर होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की सप्लाई पूरी तरह ठप हो सकती है. इसके जवाब में ट्रंप ने संकेत दिया कि अमरीका वैश्विक बाजार को स्थिर करने के लिए तेल संबंधी कुछ प्रतिबंधों में ढील देने पर विचार कर रहा है. ट्रंप ने मौजूदा संघर्ष को एक छोटा अभियान करार दिया और कहा कि अमरीकी सेना अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के बेहद करीब पहुंच चुकी है.
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ईरान का पलटवार और नया नेतृत्व
एक तरफ ट्रंप शांति के संकेत दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ युद्ध के मैदान में तनाव कम होने का नाम नही ले रहा है. ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने अमरीका के उन दावों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि ईरान का मिसाइल कार्यक्रम तबाह हो चुका है. ईरान ने अब एक टन से अधिक वजन वाले वारहेड और भारी पेलोड वाली मिसाइलों की तैनाती शुरू कर दी है. इसी बीच अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मुजतबा खामेनेई को ईरान का नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया गया है. ट्रंप ने इस नियुक्ति की कड़ी आलोचना की है और विशेषज्ञों का मानना है कि इससे तेहरान का रुख और भी कड़ा हो सकता है.
भीषण हमलों की चेतावनी
अमरीकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने चेतावनी दी है कि ईरान अब तक के सबसे तीव्र और भीषण हमलों का सामना करने वाला है. यह बयान अमरीका के सैन्य अभियान में बढ़ती आक्रामकता की ओर इशारा करता है. ट्रंप ने भी ईरान को साफ लहजे में आगाह किया है कि यदि उसने होर्मुज के रास्ते में जहाजों को रोकने की कोशिश की, तो अमरीका अपनी पूरी सैन्य ताकत के साथ जवाब देगा. फिलहाल स्थिति यह है कि एक तरफ कूटनीतिक बातचीत के जरिए रास्ता निकालने की कोशिश हो रही है, तो दूसरी तरफ दोनों देश घातक हथियारों के साथ एक-दूसरे के सामने खड़े हैं.