मध्य पूर्व संकट के बीच ईरान ने आक्रामक रुख अपनाते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कड़ा संदेश दिया है. इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने चेताया कि ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले की स्थिति में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को स्थायी रूप से बंद कर दिया जाएगा. IRGC ने स्पष्ट कहा कि तब तक यह वैश्विक तेल जीवनरेखा दोबारा खुलेगी ही नहीं, जब तक क्षतिग्रस्त परमाणु संयंत्र पूरी तरह बहाल न हो जाएं.

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरा


यह चेतावनी ट्रंप की धमकियों के सीधे जवाब में आई है, जहां उन्होंने ईरान को सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी थी. होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल गुजरता है, और इसकी पूर्ण बंदी से पेट्रोल-डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वैश्विक मंदी का गहरा संकट पैदा हो सकता है, जिसका असर भारत जैसे आयातक देशों पर सबसे ज्यादा पड़ेगा.

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इजरायल और अमेरिकी कंपनियों पर निशाना


ईरान का गुस्सा इजरायल तक फैल चुका है. आईआरजीसी ने कहा कि हमले पर इजरायल के पावर प्लांट्स, ऊर्जा ग्रिड व संचार तंत्र को ध्वस्त कर दिया जाएगा, जिससे वहां पूर्ण अंधेरा छा जाएगा. साथ ही, अमेरिकी निवेश वाली क्षेत्रीय कंपनियों को नष्ट करने की धमकी भी दी गई है. यह आर्थिक प्रतिशोध की रणनीति दर्शाता है, जो सैन्य से कहीं आगे की चोट पहुंचाएगी.

20 से अधिक देशों ने की ईरान की निंदा


मिडिल ईस्ट में विवाद 28 फरवरी से तेज हुआ, जब अमेरिका व इजरायल ने ईरान पर हमले किए. ईरान ने जवाबी कार्रवाई की, जिससे होर्मुज पहले ही आंशिक रूप से बाधित है. 20 से अधिक देशों ने ईरान की निंदा की है, लेकिन तेहरान पीछे हटने को तैयार नहीं. ट्रंप प्रशासन अब सैन्य विकल्पों पर विचाररत है, जबकि ईरान ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है. स्थिति और गंभीर होती जा रही है.