ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को बड़ा झटका देते हुए अपने फैसले से यू-टर्न ले लिया है। ईरान ने खोलने के बाद 24 घंटे के अंदर होर्मुज स्ट्रेट को फिर बंद कर दिया। शुक्रवार को खाड़ी क्षेत्र में तेल परिवहन का हब माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को फिर से बंद करने की घोषणा की है। तेहरान का कहना है कि यह कदम अमेरिका की तरफ से लगाए गए समुद्री नाकेबंदी और ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक घेरे के जवाब में उठाया गया है। ईरान की समाचार एजेंसी फार्स न्यूज के हवाले से बताया गया है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों के आवागमन को रोक दिया गया है। ईरानी अधिकारियों ने इसे अमेरिकी ब्लॉकेड और पर्शियन गल्फ के ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए नौसैनिक घेरे का सीधा जवाब बताया है।

आमने-सामने आए ईरान और अमेरिका

हालात तब और गंभीर हो गए जब ईरान की घोषणा के साथ-साथ अमेरिका ने भी इस क्षेत्र में अपनी नाकेबंदी सख्त कर दी। वर्तमान में स्थिति यह है कि दुनिया के इस सबसे व्यस्त 'ऑयल हब' में आवाजाही पूरी तरह से रुक गई है। एक तरफ ईरानी सेना डटी है, तो दूसरी तरफ अमेरिकी नौसेना ने मोर्चा संभाल रखा है।

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क्या होगा इसका असर?

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को दुनिया की 'तेल की नस' कहा जाता है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी संकरे समुद्री रास्ते से गुजरता है। जानकारों का मानना है कि:

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  • तेल की कीमतों में तेजी: सप्लाई रुकने से कच्चे तेल के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकते हैं।
  • ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित: तेल टैंकर फंसने से ऊर्जा पर निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था डगमगा सकती है।
  • युद्ध का खतरा: दोनों देशों के बीच इस नाकेबंदी से सैन्य टकराव की स्थिति बन सकती है।

फिलहाल, इस खबर के बाद पूरी दुनिया की नजरें फारस की खाड़ी पर टिकी हैं और बाजार में बेचैनी का माहौल है।

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