ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव और युद्ध के माहौल में एक बड़ा सवाल दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है. सवाल है कि इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने ईरान के सुप्रीम लीडर आयातुल्ला अली खामेनेई की लोकेशन को कैसे ट्रैक किया. इसी को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की थ्योरी तेजी से वायरल हो रही हैं. इन थ्योरी में कुछ बेहद चौंकाने वाली हैं, जबकि कुछ को विशेषज्ञ केवल अफवाह मान रहे हैं. सबसे ज्यादा चर्चा में जो थ्योरी है, वो ‘डेंटल इम्प्लांट ट्रैकिंग’ से जुड़ी हुई है.
डेंटल इम्प्लांट ट्रैकिंग थ्योरी
सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि खामेनेई के दांतों में लगाया गया डेंटल इम्प्लांट असल में एक ट्रैकिंग डिवाइस था. कुछ लोगों का कहना है कि इसी के जरिए उनकी लोकेशन की जानकारी मोसाद तक पहुंची. हालांकि, इस दावे को लेकर अब तक कोई आधिकारिक सबूत सामने नहीं आया है. विशेषज्ञों का कहना है कि ये थ्योरी तकनीकी रूप से संभव तो लगती है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है. एक दूसरी वायरल थ्योरी के मुताबिक, ईरान की ताकतवर सेना इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के अंदर कोई जासूस मौजूद था, जिसने खामेनेई से जुड़ी अहम जानकारियां दुश्मन देशों तक पहुंचाईं. कहा जा रहा है कि ईरान के अंदर से ही संवेदनशील जानकारी लीक हुई. हालांकि, ईरानी सरकार या सेना की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.
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हाई-टेक सर्विलांस और कैमरा नेटवर्क
कुछ रिपोर्ट्स में ये भी कहा गया है कि मोसाद ने ईरान के शहरों में लगे CCTV कैमरों, सैटेलाइट इमेज और डिजिटल सर्विलांस सिस्टम का इस्तेमाल किया. खुफिया एजेंसियां लंबे समय से इस तरह की तकनीक का उपयोग करती रही हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि ये थ्योरी बाकी अफवाहों के मुकाबले ज्यादा भरोसेमंद लगती है. ईरान के यातायात कैमरों को हैक किए जाने के सिद्धांत सोशल मीडिया पर फैल गए. एक यूजर ने X पर लिखा कि इजरायल ने कई सालों तक ईरान के यातायात कैमरों को हैक किया ताकि हमले से पहले खामेनेई के हर ठिकाने का पता लगाया जा सके, मोसाद यही करता है.
प्रार्थना ऐप को किया हैक
दावा है कि ईरान के लोकप्रिय प्रार्थना ऐप को इजरायल ने मनोवैज्ञानिक युद्ध के लिए हैक किया है. इसका सीधा संबंध खामेनेई का पता लगाने से नहीं है, लेकिन ये पूरी योजना का एक जरूरी हिस्सा है. ट्विटर पर एक पोस्ट में दावा किया गया है कि ईरान के लोकप्रिय प्रार्थना ऐप ‘बदेसाबा’ को जारी हमलों के बीच हैक कर लिया गया है. ऐप ने ‘मदद आ गई है’ कैप्शन वाले संदेश प्रसारित करना शुरू कर दिया है, जिसमें सेना से विद्रोह करने और शासन के खिलाफ जन आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया गया है. इजरायल ने बदेसाबा को हैक करके ईरानियों को आजादी का संदेश भेजा ताकि इजरायल और अमेरिका के हमलों के बीच ईरान के भीतर मनोवैज्ञानिक युद्ध शुरू किया जा सके.
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