स्पेन में बुधवार सुबह एक बड़ा रेल हादसा हो गया.यहां दो हाई-स्पीड ट्रेनों के बीच जोरदार टक्कर होने से कम से कम 46 यात्रियों की जान चली गई.हादसा इतना भीषण था कि टक्कर के बाद ट्रैक पर अफरा-तफरी मच गई और कई बोगियां बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं. जानकारी के अनुसार, यह दुर्घटना टोलेडो प्रांत के लॉस येबेनेस और उर्दा शहरों के बीच हुई.स्थानीय समयानुसार सुबह 9 बजे के आसपास दोनों हाई-स्पीड ट्रेनें आमने-सामने नहीं बल्कि आगे-पीछे से टकरा गईं. शुरुआती रिपोर्टों में 10 और फिर 39 मौतों की बात कही जा रही थी, लेकिन बाद में चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के हवाले से जानकारी मिली कि मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 46 तक पहुंच गया है.
मैड्रिड-अंडालूसिया रूट पूरी तरह बंद
स्पेन के सरकारी रेल नेटवर्क ऑपरेटर ‘अदिफ’ ने घटना की पुष्टि की है.अदिफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि दो ट्रेनों की टक्कर के चलते राजधानी मैड्रिड को दक्षिणी अंडालूसिया क्षेत्र से जोड़ने वाली प्रमुख हाई-स्पीड रेल लाइन पर यातायात पूरी तरह रोक दिया गया है.रेलवे प्रशासन और स्थानीय इमरजेंसी टीमें मौके पर पहुंच चुकी हैं और राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है.
प्रशासन का कहना है कि प्राथमिक ध्यान घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने और ट्रैक को साफ करने पर है.सुरक्षा कारणों से इस रूट की अन्य सभी ट्रेनों को फिलहाल रोक दिया गया है.हादसे के कारणों की तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है.
पीएम पेड्रो सांचेज ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा, “टोलेडो में हुए इस गंभीर रेल हादसे से मैं बेहद स्तब्ध हूं. मैं परिवहन मंत्री और कैस्टिला-ला मांचा के क्षेत्रीय अध्यक्ष के साथ लगातार संपर्क में बना हुआ हूं.” उन्होंने आगे लिखा, “इमरजेंसी सेवाएं मौके पर मौजूद हैं और प्रभावित लोगों की मदद व उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित प्रशासनों के साथ मिलकर काम कर रही हैं. सभी पीड़ितों और उनके परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं, एकजुटता और पूरा समर्थन है.”
स्पेन में पहले भी हो चुके हैं बड़े हादसे
स्पेन में रेल हादसों का दर्दनाक इतिहास रहा है. इसी साल जनवरी में भी दक्षिणी स्पेन में एक बड़ा ट्रेन हादसा हुआ था, जहां पटरी से उतरने के बाद एक ट्रेन सामने से आ रही दूसरी ट्रेन से टकरा गई थी. उस दर्दनाक हादसे में 45 लोगों की जान चली गई थी. यह हादसा साल 2013 के उस भीषण रेल हादसे के बाद सबसे घातक था, जिसमें करीब 80 लोगों की मौत हो गई थी.