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सऊदी अरब को किस चीज का है हर? डोनाल्ड ट्रंप से क्यों कह रहा- ईरान को मत छेड़िए

सऊदी को डर है कि ईरान जवाबी कार्रवाई के तौर पर ‘बाब अल-मंदेब’ को बंद कर सकता है. यह लाल सागर का वह अहम रास्ता है, जहां से सऊदी अरब का बचा-कुचा तेल निर्यात होता है.

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सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. (फाइल फोटो)

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच सऊदी अरब अब अमेरिका पर दबाव बना रहा है कि ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी का प्लान छोड़ दें. वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब अब पर्दे के पीछे से ट्रंप प्रशासन पर यह दबाव बना रहा है. सऊदी अरब को डर है कि ट्रंप का यह आक्रामक कदम पूरे क्षेत्र को ऐसी आग में झोंक सकता है, जिससे निकलना नामुमकिन होगा.

क्यों डरा हुआ है सऊदी अरब?

दरअसल, ट्रंप प्रशासन ने ईरान की पस्त हो चुकी अर्थव्यवस्था को पूरी तरह घुटनों पर लाने के लिए होर्मुज स्ट्रेट से होने वाले हर तरह के ईरानी शिपमेंट को रोकने का फैसला किया है. लेकिन सऊदी अरब ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि यदि ईरान को चारों तरफ से घेरा गया, तो वह चुप नहीं बैठेगा.

यह भी पढ़ें : होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका की नाकेबंदी से ईरान को कितना होगा नुकसान? रोज पानी में जाएंगे इतने करोड़

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सऊदी को डर है कि ईरान जवाबी कार्रवाई के तौर पर ‘बाब अल-मंदेब’ को बंद कर सकता है. यह लाल सागर का वह अहम रास्ता है, जहां से सऊदी अरब का बचा-कुचा तेल निर्यात होता है.

हूती विद्रोही बन सकते हैं ईरान का हथियार

सऊदी अरब की चिंता का सबसे बड़ा कारण यमन के हूती विद्रोही हैं. बाब अल-मंदेब के पास के तटीय इलाकों पर हूतियों का नियंत्रण है, जो ईरान के ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ का हिस्सा हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि ईरान इस रास्ते को बंद करना चाहता है, तो हूती उसके सबसे आसान और सक्षम पार्टनर साबित होंगे. गाजा संघर्ष के दौरान हूतियों ने पहले ही दिखा दिया है कि वे अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही को रोकने की पूरी ताकत रखते हैं.

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यह भी पढ़ें : होर्मुज के बहाने चीन पर निशाना! ट्रंप की नई धमकी का भारत पर क्या होगा असर?

तेल की ‘लाइफलाइन’ पर खतरा

पिछले छह हफ्तों के युद्ध के दौरान, होर्मुज की नाकाबंदी के बावजूद सऊदी अपना तेल पाइपलाइनों के जरिए रेगिस्तान पार कराकर लाल सागर के रास्ते दुनिया को भेज रहा है. लेकिन अगर बाब अल-मंदेब भी बंद हो गया, तो सऊदी का तेल निर्यात पूरी तरह ठप हो जाएगा.

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यही वजह है कि सऊदी अरब अब चाहता है कि अमेरिका ‘आक्रामक नाकाबंदी’ के बजाय कूटनीति का रास्ता अपनाए और ईरान के साथ बातचीत की मेज पर लौटे.

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लेखक के बारे में

Arif Khan

आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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