रूस और यूक्रेन के बीच पिछले साढ़े चार साल से चल रहा युद्ध खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है. बीते दिनों यूक्रेनी ड्रोन के जरिए रूस की ओम्स्क रिफाइनरी पर हमला किया गया. यह रिफाइनरी साइबेरिया के अंदरूनी इलाके में है. इतना ही नहीं, यूक्रेनी सेना द्वारा लगातार रूस की कई रिफाइनरियों पर हमला किया जा रहा है.

हालांकि युद्ध के मैदान में इलाकों पर कब्जा करने की रफ्तार अब पहले से धीमी हो चुकी है, लेकिन यूक्रेन ने रूस के अंदर अपने लंबी दूरी के ड्रोन हमलों को पहले से काफी तेज कर दिया है. वह सीमा से हजारों किलोमीटर दूर मौजूद एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को लगातार निशाना बना रहा है.

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यूक्रेन ने रूस के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर 194 बार किए हमले

फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार, पोलैंड की कंपनी 'रोचन कंसल्टिंग' के डेटा से पता चलता है कि 2026 की शुरुआत से अब तक यूक्रेनी ड्रोन ने रूस की तेल और गैस सुविधाओं पर कम से कम 194 बार हमले किए हैं. यह संख्या पिछले साल की तुलना में 11 गुना ज्यादा है.

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मई के बाद से ही यूक्रेन के हमलों में तेजी हुई है. एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार, 1 मई से 6 जुलाई के बीच यूक्रेन ने रूस की ऊर्जा सुविधाओं पर कम से कम 36 हमले किए हैं. ड्रोन हमलों की बड़ी संख्या रूस के एयर डिफेंस नेटवर्क पर दबाव डाल रही है, क्योंकि कई इलाकों में ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को लगातार निशाना बनाया जा रहा है.

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साइबेरिया अब 'पहुंच के दायरे में'- जेलेंस्की

सोमवार को, साइबेरिया के ओम्स्क शहर में रूस की सबसे बड़ी रिफाइनरी पर एक लंबी दूरी के ड्रोन ने हमला किया. इसके बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि साइबेरिया अब 'यूक्रेन के सटीक हमलों की पहुंच' में है.

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रॉयटर्स के अनुसार, ओम्स्क रिफाइनरी ने पिछले साल रोजाना लगभग 23 मिलियन मीट्रिक टन या 4,60,000 बैरल तेल प्रोसेस किया था.

भारत पर क्या होगा इसका असर?

रूस पर हो रहे यूक्रेन के इन हमलों के कारण भारत को होने वाले रूसी कच्चे तेल के एक्सपोर्ट में रुकावट की चिंता बढ़ गई है. हालांकि, कुछ जानकार कहते हैं कि रूस के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर यूक्रेनी ड्रोन हमलों से भारत को होने वाली कच्चे तेल की सप्लाई में रुकावट आने की संभावना कम ही है, क्योंकि ये हमले रिफाइनरियों पर हो रहे हैं, न कि एक्सपोर्ट टर्मिनल्स पर.

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, 'असल में, रूस ज्यादा कच्चा तेल एक्सपोर्ट कर रहा है क्योंकि प्रोसेसिंग क्षमता घटने की वजह से ज्यादा मात्रा उपलब्ध है. वे पहले हर दिन लगभग 5.2 मिलियन बैरल प्रोसेस करते थे, जो अब घटकर लगभग 4 मिलियन बैरल प्रति दिन रह गया है. लेकिन उनका एक्सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर अभी भी ठीक से काम कर रहा है.'

हालांकि रूसी रिफाइनिंग में रुकावट आई है, लेकिन अब तक कच्चे तेल के एक्सपोर्ट में किसी बड़ी रुकावट को लेकर कोई मामला सामने नहीं आया है. कुछ रिपोर्टों से पता चलता है कि रूस ने घरेलू कमी को पूरा करने के लिए रिफाइंड फ्यूल इम्पोर्ट किया है, जबकि मीडिया रिपोर्टों में कुछ इलाकों में पेट्रोल स्टेशनों पर लंबी कतारों की बात भी कही गई है.

ट्रंप ने पुतिन और जेलेंस्की से की बात

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वीकेंड पर रूस के पुतिन और यूक्रेन के जेलेंस्की से अलग-अलग बातचीत की और सोमवार को कहा कि इस विवाद का समाधान 'लोगों की सोच से कहीं ज्यादा करीब है.'

उम्मीद है कि ट्रंप अंकारा में NATO समिट के दौरान जेलेंस्की से बातचीत करेंगे.

पिछले कुछ महीनों में यूक्रेन ने रूस की तेल सुविधाओं पर हमले तेज कर दिए हैं. उसका मकसद राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के युद्ध के लिए जमा किए गए फंड को खत्म करना है.

यूक्रेन के राष्ट्रपति ने बीते सोमवार को कहा कि देश की सेना यारोस्लाव क्षेत्र के साथ-साथ पड़ोसी देश के अन्य इलाकों में भी रूस की तेल सुविधाओं पर हमला करने में कामयाब रही है. अधिकारियों के मुताबिक, रूस ने कीव पर मिसाइलों और ड्रोनों से जबरदस्त हमला किया, जिसमें कम से कम 19 लोगों की मौत हुई थी.