Russia Parliamentary Election 2026: रूस में तीन दिन तक चले संसदीय चुनाव के बाद वोटों की गिनती जारी है. केंद्रीय चुनाव आयोग के शुरुआती आंकड़ों में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के नेतृत्व वाली सत्ता समर्थक यूनाइटेड रशिया सबसे आगे दिखाई दे रही है. चुनाव आयोग के अनुसार इस बार कुल 56.66 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया. शुरुआती नतीजों में पार्टी को करीब 57.54 प्रतिशत वोट मिले हैं. हालांकि, मतगणना पूरी होने तक आंकड़ों में बदलाव हो सकता है.
यह चुनाव रूस में फरवरी 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद पहला संसदीय चुनाव है. इस बार स्टेट ड्यूमा की 450 सीटों के लिए मतदान हुआ. इनमें 225 सीटों का फैसला पार्टी सूची के आधार पर और बाकी 225 सीटों का चुनाव एकल निर्वाचन क्षेत्रों से होता है. शुरुआती रुझानों में यूनाइटेड रशिया दोनों तरह की सीटों पर बढ़त बनाए हुए है.
यूनाइटेड रशिया के बाद कम्युनिस्ट पार्टी और लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ रूस (LDPR) शुरुआती आंकड़ों में पीछे चल रही हैं. इसके अलावा न्यू पीपल और ए जस्ट रशिया भी संसद में सीटें हासिल करने की दौड़ में हैं. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार शुरुआती चरण में यूनाइटेड रशिया का प्रदर्शन अन्य प्रमुख दलों की तुलना में काफी आगे रहा है.
कब्जे वाले हिस्सों में भी हुए मतदान
रूस में तीन दिन तक चले संसदीय चुनाव के दौरान यूक्रेन के उन इलाकों में भी मतदान कराया गया, जिन पर मॉस्को ने कब्जा कर उन्हें अपने क्षेत्र में शामिल करने का दावा किया है. यह पहली बार है जब 2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद हुए रूसी संसदीय चुनाव में डोनेत्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया के कब्जे वाले हिस्सों के लोगों को स्टेट ड्यूमा के लिए वोटिंग प्रक्रिया में शामिल किया गया है. इन क्षेत्रों में रूस ने करीब 35 लाख से अधिक मतदाताओं का दावा किया है.
1.11 करोड़ से ज्यादा मतदाता
इस चुनाव के लिए रूस में 11.1 करोड़ से अधिक पात्र मतदाता थे. मतदान 18 से 20 सितंबर तक चला. वहीं, यूक्रेन और यूरोपीय संघ ने इन कब्जे वाले क्षेत्रों में रूसी चुनाव कराए जाने को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करार दिया है, जबकि रूस इन्हें अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है.
चुनाव के दौरान ड्रोन हमले और साइबर अटैक
मतदान के अंतिम चरण में यूक्रेन की ओर से रूस के विभिन्न हिस्सों पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमलों की खबरें भी सामने आईं. रूसी अधिकारियों ने दावा किया कि हमलों का मकसद चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करना था. इसके अलावा चुनावी ढांचे पर साइबर हमलों की भी सूचना दी गई. रूसी चुनाव आयोग ने कहा कि मतदान प्रणाली को निशाना बनाकर बड़ी संख्या में साइबर हमले किए गए, हालांकि अधिकारियों के मुताबिक चुनाव प्रक्रिया जारी रही.
वहीं, चुनाव में विपक्ष की भागीदारी को लेकर भी सवाल उठे हैं. कई युद्ध-विरोधी और विपक्षी उम्मीदवार चुनावी प्रक्रिया से बाहर रहे. कुछ विपक्षी दलों और कार्यकर्ताओं ने चुनावी माहौल पर आपत्ति जताई है, जबकि रूसी अधिकारियों ने चुनाव प्रक्रिया में गंभीर कानूनी गड़बड़ी से इनकार किया है.