मध्य पूर्व में जारी अमेरिका-ईरान के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है. दोनों देश लगातार एक दूसरे पर हमला कर रहे हैं. जिसके कारण पूरा पश्चिम एशिया इसकी चपेट में है. मिली ताजा जानकारी के अनुसार, सऊदी अरब ने पहली बार खुलकर ईरान समर्थित समूहों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े हालात तेजी से बदल रहे हैं और इराक इस संघर्ष का नया केंद्र बन गया है.
रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर किए गए ड्रोन हमलों के बाद रियाद ने इन हमलों के पीछे ईरान समर्थित इराकी सशस्त्र गुटों की भूमिका का आरोप लगाया है. इसके बाद सऊदी अरब ने अमेरिका के साथ मिलकर इराक में सक्रिय ईरान समर्थक ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की. माना जा रहा है कि यह पहली बार है जब सऊदी अरब इस संघर्ष में इस तरह से अपनी भूमिका निभाता नजर आया है.
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वहीं, मिली ताजा जानकारी के अनुसार, कुवैत में हुए ईरानी हमले में चीन की एक कंपनी में कार्यरत नेपाल के एक व्यक्ति की मौत का भी मामला सामने आया है. इसके अलावा इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया पर सऊदी अरब ने कार्रवाई की और इस दौरान IRGC के छह सदस्यों सहित 26 लड़ाकों की मौत हो गई.
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इराक बना नया सैन्य मोर्चा, हूती हमलों के बाद बढ़ा तनाव
अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को यमन के हूती विद्रोहियों ने इराकी क्षेत्र से सऊदी अरब के यानबू बंदरगाह और पूर्वी हिस्से को निशाना बनाया. प्लैनेट लैब्स द्वारा जारी सैटेलाइट इमेज में सऊदी अरामको के अबकैक ऑयल प्रोसेसिंग प्लांट को क्षति पहुंची है. यह संयंत्र दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल प्रसंस्करण केंद्रों (Oil processing centers) में शामिल है, जहां हर दिन करीब 70 लाख बैरल कच्चे तेल को प्रोसेस किया जाता है.
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सूत्रों का कहना है कि हूती लड़ाकों को इराक में सक्रिय ईरान समर्थित सशस्त्र गुटों से रसद और अन्य प्रकार का सहयोग मिल रहा है. इससे पहले भी हूती संगठन सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर कई हमलों की जिम्मेदारी सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर चुका है.
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43 देशों के सैन्य प्रतिनिधियों ने की मुलाकात
Strait of Hormuz के बाधित होने के बाद वही हाल Strait of Bab al Mandeb का न हो इसे सुनिश्चित करने के लिए गुरुवार को रियाद में 43 देशों के सैन्य प्रतिनिधियों ने मुलाकात की और Bab Al Mandeb सहित Red Sea और Gulf of Aden जैसे प्रमुख व्यापार मार्गों की सुरक्षा पर चर्चा की. इन 43 देशों में अमेरिका के शामिल होने की पुष्टि नहीं हुई है.
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- सऊदी अरब का कहना है कि IRGC ने Iraqi Militia और Houthi विद्रोहियों के बीच अपना network मबूत कर लिया है और Saudi तेल संयत्रों पर समन्वित तरीके से हमले कर रहा है.
- 43 देशों का गठबंधन सबसे पहले Red Sea व्यापार मार्ग जारी रहे इसे तय करेगा ताकि Houthis हमले न कर सकें. प्रस्तावित गठबंधन को समुद्री व्यापार पर हमलों से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को होने वाले जोखिम को कम करने का mandate दिया गया है.
- अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा है कि ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड (IRGC) का यह दावा झूठा है कि हालिया हमले में तीन अमेरिकी F-35 स्टील्थ फाइटर और तीन अन्य विमान नष्ट किए गए.
- CENTCOM के अनुसार, न तो कोई अमेरिकी विमान नष्ट हुआ और न ही क्षतिग्रस्त. हमले में ईरान की तरफ से चलाई गई सभी मिसाइलें और ड्रोन या तो इंटरसेप्ट कर दिए गए या टारगेट तक पहुंचने में विफल रहे.
- लेकिन अब तक मध्य पूर्व स्थित कई अमेरिकी बेस पर सीधे हमलों में सफल रहे ईरान ने इस बार Bahrain के Sheikh Isa Airbase पर अटैक ड्रोन से हमला किया, जिसमें पावर जनरेटर, नेविगेशन सिस्टम और प्रशासनिक इमारतों को निशाना बनाया गया.
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इराक के PM ने नहीं की सऊदी क्राउन प्रिंस से मुलाकात
क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के बीच इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने गुरुवार को सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ प्रस्तावित बैठक भी स्थगित कर दी.
इस बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया कि सऊदी अरब पर हुए ड्रोन हमलों के जवाब में पूर्वी इराक में पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स (PMF) से जुड़े हथियार भंडार और लॉजिस्टिक ठिकानों पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई की गई. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान समर्थित मिलिशिया ने 72 घंटे में करीब 30 ड्रोन हमले किए थे, जिसके बाद जवाबी अभियान चलाया गया.
हालांकि, इस कार्रवाई पर इराक में विरोध की आवाज भी अब तेज हो गई है. द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, इराकी सेना के प्रवक्ता सबा अल-नुमान ने कहा कि इस सैन्य अभियान ने चल रही जांच को प्रभावित किया है. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अब तक ऐसा कौन-सा सबूत सार्वजनिक किया गया है, जिससे यह साबित हो कि सऊदी अरब पर हमला इराकी क्षेत्र से किया गया था.