बांग्लादेश में नई सरकार के सत्ता संभालते ही सेना के शीर्ष स्तर पर बड़े बदलावों का दौर शुरू हो गया है. रविवार को सेना मुख्यालय ने एक महत्वपूर्ण फेरबदल किया, जिसमें नए चीफ ऑफ जनरल स्टाफ (सीजीएस) की नियुक्ति की गई है. लेफ्टिनेंट जनरल एम मैनुर रहमान को नया सीजीएस बनाया गया है, जो इससे पहले सेना प्रशिक्षण और सिद्धांत कमान के प्रमुख थे. यह बदलाव प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार के कार्यभार संभालने के कुछ ही दिनों बाद किए गए हैं. इस फेरबदल का असर देश की प्रमुख सैन्य खुफिया एजेंसी और रणनीतिक कमानों पर भी पड़ा है, जिसे शासन व्यवस्था को नए सिरे से व्यवस्थित करने की कोशिश माना जा रहा है.
भारत में रुके ब्रिगेडियर को मिली तरक्की
इस फेरबदल का एक दिलचस्प पहलू भारत से भी जुड़ा हुआ है. भारत में बांग्लादेश उच्चायोग के रक्षा सलाहकार के रूप में तैनात ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद हाफिजुर रहमान को वापस ढाका बुलाया गया है. उन्हें मेजर जनरल के पद पर पदोन्नत किया गया है और एक पैदल सेना डिवीजन के जीओसी के रूप में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है. इस कदम को बांग्लादेश की नई सैन्य रणनीति और महत्वपूर्ण पदों पर भरोसेमंद अफसरों की तैनाती के रूप में देखा जा रहा है. चुनाव में दो-तिहाई बहुमत मिलने के बाद तारिक रहमान ने 17 फरवरी को शपथ ली थी, जिसके साथ ही मुहम्मद यूनुस के 18 महीने के अंतरिम शासन का अंत हो गया है.
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आपसी सहयोग को बढ़ाने पर हुई चर्चा
राजनीतिक और सैन्य बदलावों के बीच भारत और बांग्लादेश के कूटनीतिक रिश्तों में भी जमी बर्फ पिघलती नजर आ रही है. ढाका में नियुक्त भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने रविवार को बांग्लादेश के नए विदेश मंत्री खलीलुर रहमान से मुलाकात की है. इस बैठक के बाद उन्होंने कहा कि भारत, बांग्लादेश की नई सरकार के साथ संवाद को आगे बढ़ाने के लिए काफी उत्सुक है. पिछले कुछ समय में दोनों देशों के रिश्तों में जो गिरावट आई थी, उसे सुधारने के लिए नई दिल्ली अब सक्रिय रूप से बातचीत करना चाहती है. इस बैठक में विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद भी मौजूद थीं, जहां आपसी सहयोग को बढ़ाने पर चर्चा हुई.
नई सरकार के आने से सुधार की उम्मीद
उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने स्पष्ट किया कि भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध परस्पर हित और लाभ के आधार पर मजबूत किए जाएंगे. उन्होंने सकारात्मक और रचनात्मक सोच के साथ हर क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाने की इच्छा जताई है. मुहम्मद यूनुस के कार्यकाल के दौरान दोनों देशों के संबंध ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर पर पहुंच गए थे, लेकिन अब नई सरकार के आने से सुधार की उम्मीदें बढ़ गई हैं. भारत का संदेश साफ है कि वह पड़ोसी देश के साथ मिलकर विकास और शांति की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है. सैन्य फेरबदल और राजनीतिक संवाद के इस दौर ने पूरे दक्षिण एशिया की नजरें बांग्लादेश की भावी दिशा पर टिका दी हैं.