PM Modi cultural diplomacy: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया के ऐतिहासिक प्रम्बानन मंदिर की यात्रा केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह भारत की साझा सभ्यतागत विरासत और मजबूत सांस्कृतिक जुड़ाव का बड़ा संदेश है. पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने विदेशों में फैले प्राचीन मंदिरों और सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने में बेहद अहम भूमिका निभाई है. भारत की इस ‘सांस्कृतिक कूटनीति’ के जरिए दुनिया भर में फैले सदियों पुराने ऐतिहासिक प्रतीकों को नया जीवन दिया जा रहा है.
प्रम्बानन मंदिर में गूंजा ‘ॐ नमः शिवाय’, पीएम मोदी बोले- फिर आऊंगा
योग्याकार्ता (इंडोनेशिया): इंडोनेशिया के ऐतिहासिक प्रम्बानन शिव मंदिर में ‘ॐ नमः शिवाय’ और महामृत्युंजय मंत्रों के दिव्य उच्चारण के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दर्शन-पूजन किया। इस आध्यात्मिक वातावरण से अभिभूत होकर प्रधानमंत्री ने कहा, “कैलाश मानसरोवर से प्रम्बानन तक शिव भक्ति की गूँज एक समान है, मैं यहाँ फिर आऊँगा।”
भारत और इंडोनेशिया ने सांस्कृतिक संबंधों को नई मजबूती देते हुए वर्ष 2029 से पहले इस 9वीं शताब्दी के यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का जीर्णोद्धार (Restoration) कार्य पूरा करने पर सहमति व्यक्त की है। यह पहल दोनों देशों की साझा विरासत और अटूट सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती है।
2014 के बाद से विदेशों में हुआ मंदिरों का कायाकल्प:
- इंडोनेशिया: 1000 साल पुराने ऐतिहासिक प्रम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण में भारत की महत्वपूर्ण साझेदारी, जो दोनों देशों के प्राचीन संबंधों को दर्शाती है.
- बांग्लादेश: 1971 में नष्ट हुए ऐतिहासिक रमना काली मंदिर और 300 साल पुराने जॉय काली माता मंदिर के पुनर्निर्माण में भारत ने आर्थिक व तकनीकी सहयोग दिया.
- नेपाल: 2015 के विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने मदद का हाथ बढ़ाते हुए नेपाल के 28 सांस्कृतिक धरोहर स्थलों का पुनर्निर्माण कराया.
- कंबोडिया व लाओस: कंबोडिया के विश्व प्रसिद्ध अंगकोर वाट, ता प्रोम और प्रेह विहार मंदिरों के संरक्षण में भारतीय विशेषज्ञों ने काम किया. वहीं, लाओस के प्राचीन ‘वाट फू’ शिव मंदिर को सहेजने में भी भारत ने योगदान दिया.
- म्यांमार: भूकंप से प्रभावित हुए बागान हेरिटेज ज़ोन और प्रसिद्ध आनंदा मंदिर का पुनरुद्धार भारतीय सहयोग से किया गया.
- बहरीन: मनामा स्थित 200 साल पुराने ऐतिहासिक श्रीनाथजी मंदिर के पुनर्विकास प्रोजेक्ट में भारत सरकार ने सहयोग किया.
- वियतनाम व श्रीलंका: वियतनाम के यूनेस्को धरोहर ‘माई सोन’ (Mỹ Sơn) शिव मंदिर परिसर का संरक्षण किया गया, जबकि श्रीलंका के प्राचीन तिरुकेतीश्वरम शिव मंदिर के पुनरुद्धार के लिए भारत ने अनुदान सहायता दी.
विदेशों में भारतीय धरोहरों के संरक्षण का यह प्रयास न केवल दुनिया में भारत की सांस्कृतिक साख को बढ़ा रहा है, बल्कि मित्र देशों के साथ हमारे रिश्तों को भी एक नई मजबूती दे रहा है.
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