Pakistan US Lobbying: एक तरफ जहां पाकिस्तान का आम आदमी बुनियादी जरूरतों और भयंकर आर्थिक संकट से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ उसके हुक्मरान अमेरिका में अपना प्रभाव खरीदने के लिए पानी की तरह पैसा बहा रहे हैं. अमेरिकी विदेश विभाग के सार्वजनिक प्रकटीकरण (FARA - Foreign Agents Registration Act) के दस्तावेजों से एक चौंकाने वाला सच सामने आया है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान वाशिंगटन में अपनी डूबती साख को बचाने और अमेरिकी नीति निर्माताओं को प्रभावित करने के लिए हर महीने लगभग 9,00000 डॉलर खर्च कर रहा है.
---विज्ञापन---
विदेशी मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान की यह भारी-भरकम रकम अलग-अलग लॉबिंग फर्मों को दी जा रही है. इसमें व्यापारिक मुद्दों को सुलझाने के लिए एक फर्म को 2,50,000 डॉलर प्रति माह और वहां के आंतरिक मंत्री की बैठकों को तय करने के लिए 50,000 डॉलर प्रति माह का भुगतान शामिल है.
---विज्ञापन---
'ऑपरेशन सिंदूर' से घबराया पाकिस्तान
यह खुलासा पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के उन दावों की भी पोल खोलता है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत ने सीमा पर तनाव के दौरान अमेरिका से मध्यस्थता की भीख मांगी थी. FARA के पेपर ट्रेल से साफ है कि कहानी पूरी तरह उलट थी. जब भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया और पाक के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में नौ आतंकी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की, तो घबराए पाकिस्तानी राजनयिकों ने अमेरिकी संसद (कैपिटल हिल), पेंटागन और अमेरिकी ट्रेजरी में करीब 60 आपातकालीन बैठकें कीं.
---विज्ञापन---
अपनी सैन्य हार को घरेलू जनता के सामने जीत की तरह पेश करने वाले पाकिस्तान की यह कूटनीतिक छटपटाहट अब पूरी दुनिया के सामने आ गई है. कर्ज के जाल में फंसे होने के बावजूद, पाकिस्तान भारत के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर माहौल बनाने और अमेरिकी प्रशासन तक पहुंच बनाने के लिए इतनी बड़ी रकम खर्च कर रहा है.
---विज्ञापन---