मध्य पूर्व में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं. इस बीच पाकिस्तान ने साफ किया है कि वो सऊदी अरब को अपना समर्थन देगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के प्रवक्ता मुशर्रफ जैदी ने सऊदी अरब के लीडर्स से बातचीत कर कहा कि पाकिस्तान इस कठिन समय में सऊदी अरब के साथ एकजुटता के साथ खड़ा है. उन्होंने क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने की जरूरत पर भी जोर दिया. अरब न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम शहबाज के प्रवक्ता ने कहा कि वो सऊदी अरब का हर हालत में साथ देने के लिए तैयार है.
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जैदी ने और क्या कहा?
प्रवक्ता मुशर्रफ जैदी ने ब्लूमबर्ग टीवी से बातचीत करते हुए कहा कि रियाद को जब भी जरूरत होगी, इस्लामाबाद उसकी मदद के लिए आगे आएगा. उन्होंने दोनों देशों के बीच लंबे वक्त से जारी सुरक्षा समझौते का हवाला दिया, जो सितंबर 2025 में साइन हुई आपसी डिफेंस डील से और मजबूत हुआ है. जैदी ने कहा कि डिफेंस एग्रीमेंट से पहले भी, दोनों देश हमेशा एक-दूसरे के लिए मौजूद रहने के सिद्धांत पर काम करते रहे हैं. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस लड़ाई को रोकने के लिए कूटनीतिक तरीके से काम कर रहा है. जैदी ने कहा कि सऊदी अरब ने पाकिस्तान की तेल और डीजल सप्लाई का समर्थन करने का बीड़ा उठाया है, क्योंकि ईरान-इजरायल युद्ध की वजह से तेल संकट बढ़ रहा है.
सऊदी-पाकिस्तान रक्षा समझौता है वजह
एक्सपर्ट्स का कहना है कि पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुआ रणनीतिक रक्षा समझौता इस समय बेहद अहम हो गया है. इस समझौते के तहत किसी एक देश पर हमला दोनों देशों पर हमला माना जा सकता है, जिससे पाकिस्तान पर सऊदी अरब की सुरक्षा में सहयोग करने का दबाव बन सकता है. हाल ही में सऊदी रक्षा मंत्री और पाकिस्तान के सेना प्रमुख के बीच भी बैठक हुई थी, जिसमें ईरान से जुड़े सुरक्षा हालात और क्षेत्रीय स्थिरता पर चर्चा की गई. इस बैठक के बाद अब पाकिस्तान ने ये साफ कर दिया है कि वो युद्ध के वक्त सऊदी अरब का साथ देगा.
ईरान ने भी दी चेतावनी
इसी बीच ईरान की ओर से भी संकेत मिले हैं कि अगर कोई देश सीधे तौर पर सऊदी अरब के पक्ष में सैन्य मदद करता है तो इसका गंभीर परिणाम हो सकता है. इससे पूरे मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पाकिस्तान इस संघर्ष में सीधे शामिल होता है तो ये टकराव सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर दक्षिण एशिया तक भी पहुंच सकता है. फिलहाल पाकिस्तान का दावा है कि वो कूटनीतिक स्तर पर हालात को संभालने की कोशिश कर रहा है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहा है. लेकिन अगर ईरान और सऊदी अरब के बीच टकराव और बढ़ता है तो पाकिस्तान की भूमिका और भी अहम हो सकती है.
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