पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति का कोई रास्ता निकलने वाला था. लेकिन, यह कूटनीतिक कोशिश अब गहरे संकट में घिर गई है. पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई एक टेलीफोनिक बातचीत और उसके बाद आई ट्रंप की 'विनाशकारी' धमकी ने पूरे समीकरण बदल दिए हैं.
जनरल मुनीर की सलाह
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में तेहरान का तीन दिवसीय दौरा कर लौटे जनरल आसिम मुनीर ने राष्ट्रपति ट्रंप को फोन कर आगाह किया कि ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकेबंदी शांति वार्ता के दूसरे दौर में सबसे बड़ी बाधा है. सूत्रों का दावा है कि ट्रंप ने इस सलाह पर विचार करने की बात कही.
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हालांकि, इस बातचीत के कुछ घंटों बाद ही विवाद शुरू हो गया. व्हाइट हाउस की एक संवाददाता ने सीधे ट्रंप से बात करने का दावा करते हुए कहा कि मुनीर ने नाकेबंदी को लेकर ऐसी कोई सिफारिश नहीं की थी. इस विरोधाभासी बयानों ने इस्लामाबाद में होने वाली अगली बैठक पर सस्पेंस बढ़ा दिया है.
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मुनीर ने तेहरान में तीन दिन के दौरान ईरान के राष्ट्रपति, विदेश मंत्री और टॉप मिलिट्री अधिकारियों समेत सीनियर लीडरशिप से मुलाकात की थी.
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पीछे हटा ईरान, अधर में जेडी वेंस का दौरा
तनाव तब और बढ़ गया जब अमेरिका ने ईरानी ध्वज वाले एक मालवाहक जहाज को जब्त कर लिया. इसके जवाब में ईरान ने इस्लामाबाद वार्ता से पीछे हटने के संकेत दिए हैं. तेहरान ने इसे अमेरिका की 'खराब नीयत' और युद्धविराम का उल्लंघन बताया है. दूसरी ओर, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भारी सुरक्षा के बीच इस्लामाबाद पहुंचने वाले थे, लेकिन अब ईरान के इनकार के बाद उनकी इस यात्रा पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं.
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ट्रंप की धमकी
कूटनीतिक तकरार के बीच रविवार को डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर आग उगलने वाला पोस्ट साझा किया. ट्रंप ने सीधे तौर पर ईरान को चेतावनी दी कि यदि उसने अमेरिकी प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया, तो वे ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचे को तहस-नहस कर देंगे. ट्रंप ने लिखा, 'हम ईरान के एक-एक पावर प्लांट और एक-एक पुल को उड़ा देंगे.'
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बता दें, इस महीने की शुरुआत में, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ US प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के लिए इस्लामाबाद गए थे. अमेरिका की ओर से उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल आया था. हालांकि, उस दौरान बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला था.