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टल सकता था 9/11 हमला? व्हाइट हाउस को हफ्तेभर पहले मिली थी अल-कायदा से जुड़ी चेतावनी

अमेरिका में 25 साल पहले वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले ने अमेरिका ही नहीं, दुनिया का इतिहास बदलकर रख दिया था. इस अटैक से करीब एक हफ्ते पहले व्हाइट हाउस को अल-कायदा से जुड़ी चेतावनी मिल गई थी, ऐसे में अगर जल्द सुराग निकाल लिया जाता तो शायद हमला रोका जा सकता था.

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जब वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुआ था हमला (AI Image)

US Received Al-Qaeda Threat Before 9/11 Attack: 11 सितंबर 2001 के आतंकवादी हमलों से कुछ दिन पहले यूएस के आतंकवाद-रोधी विभाग के सीनियर अधिकारी रिचर्ड ए क्लार्क ने चेतावनी दी थी कि अल-कायदा अमेरिकियों के लिए एक गंभीर और तत्काल खतरा है. हमलों से तकरीन एक हफ्ते पहले व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में हुई एक मीटिंग में ओसामा बिन लादेन के आतंकवादी नेटवर्क से बढ़ते खतरे पर चर्चा हुई. इसमें शामिल क्लार्क ने तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार कोंडोलीज़ा राइस से निजी तौर पर सवाल किया कि क्या प्रशासन अल-कायदा के खतरे को गंभीरता से ले रहा है.

USS कोल अटैक के बाद आई चेतावनी

अक्टूबर 2000 में यमन में USS कोल पर हुए बम हमले, जिसमें 17 अमेरिकी नाविक मारे गए थे. इसके बाद से ही क्लार्क अल-कायदा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की वकालत कर रहे थे. जनवरी 2001 के एक मेमो में उन्होंने अल-कायदा को एक बहुत ही संगठित और सक्रिय संगठन बताया था जो बड़े हमले करने में सक्षम था.

बाद में राइस को दी गई चेतावनी में क्लार्क ने तर्क दिया कि USS कोल बम हमले पर अमेरिकी सेना की ओर से कोई जवाबी कार्रवाई न होने से अल-कायदा और तालिबान का हौसला बढ़ सकता है. उन्हें डर था कि ये समूह यह सोच सकते हैं कि अमेरिकियों पर हमला करने का कोई खास नतीजा नहीं होगा. क्लार्क ने नीति-निर्माताओं से भविष्य की ऐसी स्थिति पर विचार करने की गुजारिश की जिसमें अल-कायदा के कई हमलों में सैकड़ों अमेरिकी मारे जाएं और पूछा कि अधिकारी तब क्या चाहेंगे कि उन्होंने पहले क्या किया होता.

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अफगानिस्तान रणनीति पर असहमति

क्लार्क ने पेंटागन और CIA के भीतर अफगानिस्तान को अमेरिकी आतंकवाद-रोधी नीति का मुख्य केंद्र बनाने के को लेकर दिखाई गई हिचकिचाहट की भी आलोचना की. मीटिंग की डिटेल के मुताबिक, अधिकारियों ने इस बात पर भी बहस की कि अफगानिस्तान के ऊपर प्रीडेटर सर्विलांस फ्लाइट कब फिर से शुरू की जानी चाहिए, लेकिन कोई क्लियर फैसला नहीं हो सका.

बाद में कोंडोलीजा राइस ने 9/11 आयोग को बताया कि क्लार्क की चेतावनी अहम थी. हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में उनके लंबे तजुर्बे के कारण उन्हें उन एजेंसियों से निराशा हो सकती थी जिन्होंने उनके पसंदीदा तरीके को नहीं अपनाया.

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बाद में क्लार्क का मानना ​​था कि अल-कायदा के खिलाफ असरदार रणनीति बनाने में कई साल लग सकते हैं. इसके बजाय, आतंकवादी ग्रुप ने कुछ ही दिनों में हमला कर दिया, जिससे ऐसी घटनाएं हुईं जिन्होंने ग्लोबल सिक्योरिटी को पूरी तरह से बदल दिया.

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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