पश्चिम एशिया में जंग जारी है और इस जंग का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ना शुरू हो चुका है. होर्मुज स्ट्रेट बंद हो चुका है और अब इसके बंद होने के बाद से भारत सहित दुनिया भर के कई देशों को अपनी ऊर्जा आपूर्ति की चिंता सताने लगी है. वहीं, कई देशों को लगातार असुरक्षा का सामना भी करना पड़ रहा है.
ऐसे में भारत में यूएई के पूर्व राजदूत हुसैन हसन मिर्जा का एक बयान सुर्खियों में है. दरअसल, हुसैन मिर्जा ने कहा कि 'पीएम मोदी अगर ईरान और इजरायल में बैठे अपने समकक्षों से बात करते हैं, तो उनका एक फोन कॉल इस मुद्दे को हल करवा सकता है.'
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पीएम मोदी की एक फोन कॉल...
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार, मिर्जा ने इस युद्ध की वजह से यूएई को हो रही परेशानियों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात नहीं चाहता है कि यह युद्ध ज्यादा लंबा खिंचे और न ही वह अपने क्षेत्र का इस्तेमाल किसी तरह के हमले के लिए होने देगा. मिर्जा ने आगे कहा, 'सच कहूं तो मुझे समझ नहीं आता कि हम इसमें क्यों शामिल हों. यूएई के इसमें शामिल होने का कोई कारण नहीं है.'
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हमारा दोनों पक्षों से संबंध- मिर्जा
मिर्जा ने कहा कि अबू धाबी ईरान और इजरायल दोनों का साझेदार है, यह दोनों के बीच एक बार फिर से संबंध स्थापित करवा सकता है. प्रधानमंत्री मोदी द्वारा यूएई के राष्ट्रपति से बातचीत का जिक्र करते हुए मिर्जा ने कहा कि पीएम मोदी का सम्मान न केवल खाड़ी देशों में है बल्कि पूरे क्षेत्र के आम लोगों के बीच में भी है.
उन्होंने कहा, 'मोदी का ईरान और इजरायल में अपने समकक्षों को एक फोन कॉल करने से इस समस्या को हल कर सकता है, इस मुद्दे को खत्म कर सकता है. यह विश्वास पीएम मोदी की दोनों नेताओं के साथ मजबूत प्रतिष्ठा पर आधारित है, जो इस समय उस युद्ध में लड़ रहे हैं.'
इस संघर्ष पर पूरे क्षेत्र पर असर, बढ़ सकती है तेल की कीमत
UAE के पूर्व राजदूत ने आगे कहा कि इस संघर्ष का असर पूरे क्षेत्र पर पड़ रहा है, बीमा कंपनियां जहाजों का बीमा करने से कतरा रही हैं और समुद्री व्यापार बाधित हो रहा है. यदि संघर्ष जारी रहता है, तो आने वाले महीनों में तेल की कीमतों में काफी वृद्धि हो सकती है. आर्थिक नुकसान के बावजूद, हवाई अड्डों को बंद करने और उन पर प्रतिबंध लगाने के उपाय मुख्य रूप से सुरक्षा कारणों से लागू किए गए हैं.