OMG! 'मौत का सामान' लेकर पैदा हुआ बच्चा; पेट की हालत देख डॉक्टर्स चौंके, मुश्किल से बचाई जान

Rifile Pellet Stucked in Baby Stomach: एक बच्चे का जन्म ऐसी चीज के साथ हुआ, जिस वजह से उसकी मौत भी हो सकती थी। डॉक्टरों ने घटनाक्रम को चमत्कार बताया और समय रहते सर्जरी करके बच्चे की जान बचा ली। आइए जानते हैं कि आखिर मामला क्या है?

New Born Baby

बच्चे को सुरक्षित रिकवर कर लिया गया है।

UK Britain Doctos Faced Bizzare Case: घर में बच्चे के जन्म की खुशी लोग मनाते हैं। बच्चा स्वस्थ हो तो माहौल और ज्यादा खुशनुमा हो जाता है, लेकिन कभी-कभी बच्चे ऐसे हालातों में पैदा होते हैं, जहां चाहकर भी खुशी नहीं मनाई जा सकती। ऐसा ही कुछ रूस के मॉस्को शहर में हुआ, जहां एक महिला ने बेटे को जन्म दिया, लेकिन दुख की बात यह है कि वह बच्चा अपनी ‘मौत का सामान’ साथ लेकर पैदा हुआ।

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जी हां, बच्चे के पेट में एयर राइफल की गोली का छर्रा था, जो गर्भावस्था के दौरान उसकी मां को लगी थी। हालांकि बच्चे के पेट से गोली का छर्रा निकाल दिया गया है, लेकिन बच्चे के पेट की हालत देखकर एक बार डॉक्टर्स भी हैरान रह गए थे। उन्होंने बड़ी मुश्किल से बच्चे की जान बचाई। समय रहते गोली को निकाल दिया गया, नहीं तो गोली उसके शरीर के अन्य अंगों को डैमेज कर सकती थी। डॉक्टरों ने इसे दुर्लभ केसों में एक केस बताया है। इस केस के बारे में डॉक्टरों ने मीडिया कर्मियों को भी बताया।

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पति की राइफल से चली गोली लगी थी महिला को

द सन की रिपोर्ट के अनुसार, गर्भवती महिला को उसके पति की राइफल से चली गोली लग गई थी। गोली गलती से चली थी, जब उसका पति राइफल की सफाई कर रहा था। महिला क्योंकि गर्भावस्था के आखिरी महीने में थे तो गोली लगने से उसे प्रसव पीड़ा हुई। महिला का अल्ट्रासाउंड करने पर गोली का छर्रा बच्चे के पेट में धंसा दिखा। किसी अनहोनी की आशंका से डॉक्टरों ने स्कैनिंग कराई तो पता चला कि गोली का छर्रा बच्चे के पेट के नरम ऊतकों में फंसा था, जो करीब एक सेंटीमीटर लम्बा और आधा सेंटीमीटर चौड़ा था।

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गोली का छर्रा नजर आने और उसकी लोकेशन पता चलने के बाद डॉक्टरों ने निर्णय लिया कि महिला और उसके बच्चे की जान को बचाने का सबसे सुरक्षित उपाय यह है कि गोली निकालने का प्रयास करने से पहले बच्चे के जन्म तक इंतजार किया जाए। उसके जन्म के तुरंत बाद, उसके पेट से गोली निकाल दी जाएगी। समय पर बच्चे का जन्म हुआ और पैदा होते ही उसकी सर्जरी करके गोली निकाल दी गई। बच्चे को टांके लगे, लेकिन डॉक्टरों ने उसे अपनी निगरानी में रखा और अब जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। दोनों को डिस्चार्ज करके उनके घर भेज दिया गया है।

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पेट के आंतरिक हिस्से तक नहीं पहुंचा था छर्रा

अस्पताल के बेबी केयर सेंटर के निदेशक डॉ. मिखाइल जॉर्जिविच रेखविआश्विली ने बताया कि राइफल में इस्तेमाल होने वाली कुछ गोलियां सीसे से बनी होती हैं। यदि सीसे से गनी गोलियां शरीर में फंस जाती हैं और बहुत लंबे समय तक वहां रहती हैं तो इससे जहर पैदा होगा, जो जानलेवा साबित होगा। ब्रिटेन में हर साल एयरगन की गोली लगने से एक शख्स की मौत होती है। इंग्लैंड और वेल्स में एयरगन जैसा हथियार रखने के लिए सर्टिफिकेट नहीं चाहिए, लेकिन इसे खरीदने या किराए पर लेने के लिए आपकी उम्र 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बच्चे के पेट के अगले हिस्से में गोली का छर्रा धंसा था। पेट को छूने पर डॉक्टरों को चमड़ी के नीचे एक गांठ होने का पता चला तो सर्जरी करके उसे निकालना आसान हो गया। पेट का अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे किया तो पता चला कि गोली का छर्रा बिल्कुल पेट की सतह पर है। वह अभी बच्चे के आंतरिक अंगों को नहीं पहुंची है, इसलिए बच्चे की जान को कोई खतरा नहीं है, लेकिन इसे समय रहते निकालना जरूरी था, इसलिए एक दिन की देरी भी नहीं की गई।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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