जब हम कच्चे तेल की बात करते हैं तो हमारा ध्यान सिर्फ पेट्रोल और डीजल तक सीमित रहता है लेकिन असली संकट रिफाइनरी के सबसे निचले हिस्से यानी ‘फ्यूल ऑयल’ को लेकर पैदा हो गया है. यह कच्चा तेल साफ करने के बाद बचा हुआ वह अवशेष है जिसे अक्सर बेकार समझा जाता है पर असल में दुनिया के तमाम बड़े मालवाहक जहाज इसी के दम पर चलते हैं. ईरान युद्ध की वजह से अब यह सस्ता ईंधन इतना महंगा और दुर्लभ हो गया है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार ठप होने की कगार पर पहुंच गया है. शिपिंग कंपनी मार्सक के मुताबिक अगर सप्लाई जल्द नहीं सुधरी तो एशिया के प्रमुख बंदरगाहों पर ईंधन का स्टॉक पूरी तरह खत्म हो जाएगा.
तेल का बिगड़ा गणित और आसमान छूती कीमतें
आमतौर पर कच्चे तेल और उससे बनने वाले उत्पादों के दाम एक साथ घटते-बढ़ते हैं लेकिन इस बार बाजार का पुराना गणित फेल हो चुका है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पास है मगर जहाजों में इस्तेमाल होने वाला फ्यूल ऑयल सिंगापुर में 140 डॉलर और फुजैरा में 160 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है. पर्यावरण मानकों वाले इसके कुछ खास प्रकार तो 175 डॉलर की रिकॉर्ड कीमत पर बिक रहे हैं जो साल 2008 और 2022 की तेजी से भी कहीं ज्यादा है. हालात यह हैं कि तेल व्यापारी फोन पर सिर्फ कुछ मिनटों के लिए भाव दे रहे हैं और तुरंत सौदा न होने पर कीमतें और बढ़ा दी जा रही हैं.
यह भी पढ़ें: ईरानी ड्रोन के हमले से दुबई एयरपोर्ट के फ्यूल टैंक में लगी आग, फ्लाइट्स को रोका
होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना बना जी का जंजाल
इस भीषण संकट की सबसे बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता बंद होना है क्योंकि यह मार्ग सिर्फ कच्चे तेल के लिए ही नहीं बल्कि खाड़ी देशों की रिफाइनरियों से निकलने वाले फ्यूल ऑयल का भी मुख्य रास्ता है. दुनिया के कुल फ्यूल ऑयल व्यापार का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा सऊदी अरब, कुवैत और यूएई से आता है. खाड़ी देशों का कच्चा तेल रिफाइनिंग के बाद 50 प्रतिशत तक अवशेष छोड़ता है जबकि अमेरिकी तेल से बहुत कम फ्यूल ऑयल निकलता है. अब चूंकि रिफाइनरियों को अमेरिकी या रूसी तेल पर निर्भर होना पड़ रहा है इसलिए बाजार में फ्यूल ऑयल का उत्पादन भारी मात्रा में घट गया है.
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर महंगाई की नई मार
फिलहाल अमेरिका और यूरोप के बंदरगाहों से जहाजों के जरिए एशिया तक फ्यूल ऑयल पहुंचाकर स्थिति को संभालने की कोशिश की जा रही है. दुनिया अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का बड़ा हिस्सा पहले ही इस्तेमाल कर चुकी है जिससे आने वाले समय में चुनौती और बढ़ने वाली है. अगर होर्मुज का रास्ता लंबे समय तक बंद रहा तो कंटेनर जहाजों के पास अपनी यात्रा पूरी करने के लिए ईंधन नहीं बचेगा जिससे सामानों की आवाजाही रुक जाएगी. रिफाइनरी टावर के सबसे निचले हिस्से से निकलने वाला यह तेल आज वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है जिससे दुनिया भर में महंगाई की नई लहर आ सकती है.
संबंधित खबरें
ट्रंप की हार का भारत पर क्या होगा असर? ट्रेड डील से वीजा तक जानें सबकुछ
1 hr agoमिडटर्म चुनाव में कैसा रहा भारतीय मूल के नेताओं का प्रदर्शन, किसकी हुई जीत?
1 hr agoअमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी की बड़ी जीत, दोनों सदनों में बहुमत हासिल
2 hrs agoअमेरिका मिडटर्म चुनाव में ट्रंप ने क्यों मानी हार? 5 बड़े कारण
3 hrs agoपाकिस्तान में 7000 रुपये का हुआ 12KG गैस सिलेंडर! खाने के लाले पड़े
5 hrs ago'मैं बैलेट पेपर पर होता...', मिडटर्म चुनाव नतीजों के बीच ट्रंप का पहला बयान
6 hrs agoकौन हैं भारतीय मूल की पिया डांडिया? जो US मिडटर्म चुनाव में जीतीं
7 hrs agoNASA एस्ट्रोनॉट अनिल मेनन ने स्पेस से US मिडटर्म में डाला वोट
8 hrs agoLIVE: रियाद एयरपोर्ट पर हूतियों के हमले में घायल दूसरे भारतीय ने तोड़ा दम
9 hrs ago'डोनाल्ड ट्रंप को हम मार डालेंगे', ईरान की होर्डिंग-पेटिंग लगाकर खुली धमकी
9 hrs agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines